चेन्नई, 31 मई (भाषा) तमिलनाडु में सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) और विपक्षी दल द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सहित कई पार्टियों ने लोक भवन में तमिल संत तिरुवल्लुवर को भगवा पोशाक में दर्शाए जाने की आलोचना की, जबकि आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त चित्र में उन्हें सफेद वस्त्र में दिखाया गया है।
राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने 30 मई को ‘वैकासी अनुषम’ महोत्सव के उपलक्ष्य में लोक भवन में तिरुवल्लुवर के एक चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की थी, जिसमें उन्हें भगवा पोशाक में दर्शाया गया था। इस घटनाक्रम के बाद राज्यपाल की आलोचना का सिलसिला शुरू हो गया।
तमिलनाडु के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. अनुराज ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए तिरुवल्लुवर को भगवा पोशाक में दर्शाये जाने की निंदा की।
अनुराज ने कहा कि वैश्विक स्तर पर विख्यात संत को एक संकीर्ण पहचान तक सीमित करने का कोई भी प्रयास उनके सार्वभौमिक दृष्टिकोण को कमतर आंकने के बराबर है।
उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “लोक भवन या किसी भी सरकारी और सार्वजनिक स्थान पर तिरुवल्लुवर को भगवा पोशाक में दर्शाया जाना सरासर गलत है। तिरुवल्लुवर किसी धर्म, जाति, नस्ल या राष्ट्र तक सीमित नहीं थे। उनकी ‘तिरुक्कुरल’ पूरी मानवता के लिए जीवन का साझा सिद्धांत पेश करती है।”
टीवीके के वरिष्ठ नेता अनुराज ने कहा कि ‘कदावुल वझथु’ (ईश्वर का आह्वान) अध्याय में भी तिरुवल्लुवर ने किसी विशेष धर्म से संबंधित देवी-देवताओं का नाम लेने के बजाय ‘आदि भगवान’, ‘मलारमिसाई येगिनन’ और ‘अरवाझी अंधनन’ जैसे तटस्थ एवं सार्वभौमिक विशेषणों का सावधानीपूर्वक इस्तेमाल किया है।
मंत्री ने कहा, “जब उन्होंने (तिरुवल्लुवर) खुद को एक सार्वभौमिक व्यक्ति के रूप में स्थापित किया, तो उन्हें किसी विशिष्ट धर्म से जुड़े रंग में पेश करना उनके वैश्विक दर्शन के विपरीत है। तिरुवल्लुवर ने हमें जन्म से ही सभी के समान होने का उपदेश दिया। उन्हें किसी विशिष्ट रंग में कैद करने की कोशिश समुद्र को मटके में समेटने के प्रयास के समान है। राजनीतिक लाभ के लिए उन्हें भगवा रंग में रंगना सरासर अस्वीकार्य है।”
अनुराज ने नेताओं से आग्रह किया कि वे तिरुवल्लुवर के कपड़ों का रंग बदलने के बजाय ‘तिरुक्कुरल’ में सुझाए गए रास्ते पर चलें।
द्रमुक नेता उदयनिधि स्टालिन ने लोक भवन में प्रतीकों को भगवा रूप में दर्शाये जाने और इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली नवगठित टीवीके सरकार की “निष्क्रियता” की आलोचना की।
उन्होंने आरोप लगाया कि लोक भवन ने तिरुवल्लुवर को भगवा रंग में रंगने का कार्य केवल इसलिए किया, क्योंकि वर्तमान मुख्यमंत्री हमेशा “चुप” रहते हैं।
उदयनिधि ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “उन्होंने राज्यपाल के आवास पर तिरुवल्लुवर को एक बार फिर भगवा रंग में रंग दिया है। उन्होंने यह साहस इसलिए दिखाया, क्योंकि वर्तमान मुख्यमंत्री हमेशा ‘म्यूट’ मोड में रहते हैं।”
द्रमुक नेता ने राज्य के पारंपरिक कैलेंडर से इतर ‘वैकासी अनुषम’ मनाने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा, “तमिलनाडु सरकार आधिकारिक तौर पर जनवरी में तिरुवल्लुवर दिवस मनाती है। इसे ‘वैकासी अनुषम’ के मौके पर मनाने की यह मनगढ़ंत प्रथा कहां से आई?”
उदयनिधि ने पूर्ववर्ती द्रमुक सरकार की विरासत का हवाला देते हुए कहा, “द्रमुक शासन के दौरान, जब तत्कालीन राज्यपाल ने इसी तरह का हथकंडा अपनाने की कोशिश की थी, तब हमने उनकी कड़ी निंदा की थी। अब वह एक बार फिर तमिल लोगों के आत्मसम्मान की परीक्षा ले रहे हैं।”
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के प्रदेश सचिव पी शणमुगम ने राज्यपाल पर निशाना साधते हुए ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि जहां तिरुवल्लुवर ने जन्म से समानता पर जोर दिया, वहीं राज्यपाल उन्हें सनातनी के रूप में पेश करते हैं, जो निंदनीय है।
शणमुगम ने लिखा, “किसी भी धर्म से संबंध न रखने वाले तिरुवल्लुवर को भगवा पोशाक में दर्शाया जाना उनका अपमान है। इसके लिए राज्यपाल आर्लेकर को तमिलनाडु की जनता से माफी मांगनी चाहिए।”
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के प्रदेश सचिव एम वीरपांडियन ने संवाददाताओं से बातचीत के दौरान लोक भवन में तिरुवल्लुवर को भगवा पोशाक में दर्शाए जाने के घटनाक्रम को अस्वीकार्य करार दिया।
उन्होंने कहा, “राज्यपाल को तमिल संस्कृति से जुड़े पहलुओं का सम्मान करना चाहिए। अगर इन सांस्कृतिक पहलुओं को गलत दिशा में मोड़ा गया, तो समय इसे स्वीकार नहीं करेगा और इतिहास इसे माफ नहीं करेगा।”
मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एमडीएमके) के महासचिव वाइको ने इस घटनाक्रम के बारे में पूछे जाने पर राज्यपाल की आलोचना की। उन्होंने कहा, “यह (तिरुवल्लुवर के चित्र को भगवा रंग देना) सरासर धूर्तता है। लोक भवन में तिरुवल्लुवर के चित्र को भगवा वस्त्र में दर्शाने के लिए कितनी हिम्मत होनी चाहिए। क्या उन्हें लगता है कि तमिलनाडु इतना कमजोर है?”
भाषा पारुल सुभाष
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