नयी दिल्ली, 31 मई (भाषा) कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को सीबीएसई ओएसएम विवाद को लेकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पास अपने मासिक रेडियो संबोधन में आमों के बारे में बोलने का समय था, लेकिन उन 18.5 लाख बच्चों के बारे में बोलने का समय नहीं था, जिनकी उत्तर पुस्तिकाओं को फोन से स्कैन किया गया।
लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (ओएसएम) मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी की ‘‘चुप्पी’’ अब उदासीनता नहीं, बल्कि ‘‘मिलीभगत’’ है।
रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने फलों के राजा आम का भी उल्लेख करते हुए कहा कि गर्मी के मौसम में शायद ही कोई घर हो, जहां आम की चर्चा न होती हो। उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र का अपना आम और उसकी अपनी सुगंध होती है।
उन्होंने कहा, ‘‘महाराष्ट्र का हापुस या अल्फांसो, गुजरात का केसर- ये तो आमरस की जान हैं। उत्तर प्रदेश का दशहरी और मेरी काशी का लंगड़ा। बिहार का जर्दालू जिसकी खुशबू दूर से पहचान में आ जाए। चौसा, मालदा...हर नाम के साथ लोगों की यादें जुड़ी हुई हैं।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर कोई दक्षिण भारत जाए तो उसे बंगनपल्ली, तोतापुरी, नीलम, मलगोवा, पश्चिम बंगाल के हिमसागर, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के सुवर्णरखा जैसी अन्य किस्में मिलेंगी।
राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि सीबीएसई के मई 2025 की निविदा में उत्तर पुस्तिकाओं को ‘स्वचालित रोबोटिक स्कैनर’ से स्कैन करने की शर्त थी और स्कैनिंग का रिजॉल्यूशन कम से कम 300 डीपीआई (डॉट्स प्रति इंच) होना चाहिए था।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ‘‘अगस्त में दोबारा जारी की गई निविदा में चुपचाप ये सारी शर्तें हटा दी गईं। ‘स्कैनर’ शब्द सामान्य हो गया। रिज़ॉल्यूशन घटकर 200 डीपीआई हो गया। अब हमें पता चल गया है कि असल में इसका क्या मतलब था। यह खुलासा हुआ है कि ‘कोएम्प्ट’ ने मोबाइल फोन का इस्तेमाल करके उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन किया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘धुंधली प्रतियां, गायब पन्ने, बिना स्कैन की गई किताबें - ये ‘गलतियां’ नहीं हैं। ये वेंडर के हितों को ध्यान में रखकर लिखे गए अनुबंध का अपेक्षित परिणाम हैं।’’
गांधी ने कहा कि यह धोखाधड़ी है और जिन बच्चों के अंक गलत तरीके से आंके गए हैं, वे सभी इसके शिकार हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘आज सुबह प्रधानमंत्री के पास आमों के बारे में बोलने का समय था। उनके पास उन 18.5 लाख बच्चों के बारे में बोलने का समय नहीं है, जिनकी उत्तर पुस्तिकाओं को फोन से स्कैन किया गया था। धर्मेंद्र प्रधान जी अब भी अपने पद पर बने हुए हैं। मोदी जी की चुप्पी अब उदासीनता नहीं, बल्कि ये मिलीभगत है।’’
भाषा शफीक दिलीप
दिलीप