नयी दिल्ली, 31 मई (भाषा) कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के हसदेव-अरण्य वन क्षेत्र में कोयला खनन परियोजना को मंजूरी दिए जाने को लेकर रविवार को नरेन्द्र मोदी सरकार पर निशाना साधा। पार्टी ने आरोप लगाया कि भाजपा की ‘‘ट्रबल-इंजन सरकार’’ आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन तथा पारिस्थितिकी तंत्र को होने वाले नुकसान की परवाह किए बिना इस परियोजना को हर हाल में आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
विपक्षी दल ने यह हमला ऐसे समय किया है, जब कुछ दिन पहले छत्तीसगढ़ के हसदेव-अरण्य वन क्षेत्र में कोयला खनन के प्रस्ताव को पर्यावरण मंत्रालय की वन सलाहकार समिति (एफएसी) से महत्वपूर्ण मंजूरी मिल गई। इस परियोजना के लिए लाखों पेड़ों की कटाई करनी पड़ सकती है।
यह खनन कार्य सरगुजा जिले के केंटे एक्सटेंशन ओपनकास्ट कोल ब्लॉक में प्रस्तावित है, जिसे अदाणी समूह द्वारा विकसित किया जा रहा है।
कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि मोदी सरकार ने छत्तीसगढ़ के केंटे एक्सटेंशन ओपनकास्ट कोल ब्लॉक में ‘‘मोदाणी’’ द्वारा कोयला खनन को मंजूरी दे दी है, जिसका 98 प्रतिशत हिस्सा हसदेव अरण्य के साल के जंगलों के अंतर्गत आता है।
रमेश ने ‘एक्स’ पर कहा कि इस परियोजना के कारण कम से कम सात लाख पेड़ों की अंधाधुंध कटाई होगी।
उन्होंने दावा किया कि यह परियोजना तेंदुओं, रीछ और भारत के राष्ट्रीय धरोहर पशु हाथियों सहित जैव विविधता के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा पैदा करेगी। उन्होंने कहा कि इससे मानव-पशु संघर्ष में वृद्धि होगी क्योंकि कोयला ब्लॉक लेमरू हाथी गलियारे से मात्र 3.6 किलोमीटर दूर है।
रमेश ने तर्क दिया कि इस परियोजना का हसदेव नदी और बांगो बांध के जल प्रवाह पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि ये वन क्षेत्र इनका जलग्रहण क्षेत्र हैं।
रमेश ने याद दिलाया कि 26 जनवरी 2022 को भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने छत्तीसगढ़ विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें कहा गया था कि हसदेव अरण्य क्षेत्र में किसी भी खनन पट्टे को मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘सत्ता में आने के बाद से ‘मोदाणी ट्रबल-इंजन’ सरकार इस परियोजना को हर हाल में आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है, चाहे इसकी कितनी भी कीमत आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन तथा पर्यावरणीय तंत्र को क्यों न चुकानी पड़े।’’
भाषा आशीष अविनाश
अविनाश