नयी दिल्ली/ तिरुवनंतपुरम, 15 अप्रैल (भाषा) केरल के विपक्षी सांसदों ने बृहस्पतिवार को कहा कि यदि महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को परिसीमन जैसी किसी भी शर्त के बिना संसद में पेश किया जाता है तो वे इसका विरोध नहीं करेंगे।
नयी दिल्ली में संवाददाताओं से बातचीत में कांग्रेस नेता के सी वेणुगोपाल ने केंद्र के कदम को “भ्रामक जाल” करार दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा लाए गए विधेयकों में अक्सर “छिपे एजेंडे” होते हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा, “यह विधेयक खतरनाक है क्योंकि इससे लोकतंत्र संकट में पड़ सकता है। इसके प्रावधानों को देखकर इसे समझा जा सकता है।”
वेणुगोपाल ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक वर्ष 2023 में पहले ही सर्वसम्मति से पारित हो चुका है।
उन्होंने आरोप लगाया, “उस विधेयक की आड़ में, पिछले तीन वर्षों में कुछ किए बिना, अब अपनी सुविधा के अनुसार बड़े पैमाने पर परिसीमन का प्रस्ताव लाया जा रहा है। यह लोकतंत्र को हथियाने का प्रयास है।”
उन्होंने कहा कि केरल जैसे राज्य, जिन्होंने परिवार नियोजन उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया है, इस प्रस्ताव से प्रभावित होंगे।
असम में परिसीमन का उदाहरण देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि यह भाजपा के पक्ष में किया गया था।
उन्होंने कहा, “विधेयक के पीछे कई खतरे हैं। भाजपा को लगता है कि वह 2029 का चुनाव नहीं जीत पाएगी, इसलिए लोकतंत्र को कमजोर कर आसान रास्ता अपनाया जा रहा है।”
केरल कांग्रेस (एम) के अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य जोस के मणि ने कहा कि महिला आरक्षण पर कोई मतभेद नहीं है।
उन्होंने कहा, “मौजूदा संशोधन के पीछे मंशा चुनावी प्रक्रिया को विकृत करना है। हमारी मांग है कि आरक्षण मौजूदा 543 लोकसभा सीट के भीतर ही लागू किया जाए।”
उन्होंने कहा कि सीटों की संख्या बढ़ाने से असमानताएं पैदा हो सकती हैं, जिससे दक्षिणी राज्य प्रभावित होंगे।
मणि ने कहा, “दक्षिणी राज्यों द्वारा अपनाए गए जनसंख्या नियंत्रण उपायों के अलावा, मौजूदा प्रस्ताव शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच असमानता बढ़ा सकता है, जिससे विकास प्रभावित होगा।”
आरएसपी नेता एन के प्रेमचंद्रन ने कहा कि सभी विपक्षी दलों ने 2023 के महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन किया था।
उन्होंने कहा, “विधेयक पहले ही पारित हो चुका है, जिसमें संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। हम महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसकी आड़ में संविधान में संशोधन कर केंद्र सरकार की प्रधानता स्थापित करने के लिए परिसीमन प्रस्ताव लाया जा रहा है।”
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) की नेता एनी राजा ने कहा कि परिसीमन और जनगणना से जुड़ी शर्तों के बिना महिला आरक्षण संशोधन विधेयक का समर्थन करने का निर्णय लिया गया है।
उन्होंने कहा, “यदि विधेयक ऐसी शर्तों के बिना पेश किया जाता है, तो ‘इंडिया’ गठबंधन के घटक दल इसे पारित करने के लिए तैयार हैं लेकिन हम परिसीमन प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हैं।”
सोलह से 18 अप्रैल तक संसद के विशेष सत्र में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को मूर्त रूप देने के लिए बृहस्पतिवार को एक विधेयक संसद में पेश किया जाएगा, जिसमें संसद के निचले सदन में सदस्यों की मौजूदा संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है।
इसके साथ ही, सरकार परिसीमन आयोग के गठन के लिए भी एक विधेयक तथा इनसे संबंधित केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026 लाने की तैयारी में है।
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