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संत संसद 2026: एक हाथ में माला, दूसरे में भाला, साध्वी सरस्वती दीदी का संत संसद में संदेश

नेटवर्क 10 न्यूज चैनल ने 29 मार्च को ‘संत संसद’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया। इस कार्यक्रम में देश के कोने-कोने से साधु-संत और महात्मा शामिल हुए। इस आयोजन का मुख्य विषय था— “अब नहीं होगा कोई जात-पात, बात होगी सिर्फ राष्ट्रवाद।” इस विषय पर संतों ने अपने विचार रखे और समाज से जातिवाद से ऊपर उठकर एकजुट होकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। 

इस भव्य आयोजन में साध्वी सरस्वती दीदी भी शामिल हुई। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वे उस परंपरा की संवाहक हैं, जिसमें “एक हाथ में माला और दूसरे हाथ में भाला” का संतुलन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में क्या चल रहा है या लोग किस प्रकार के वस्त्र पहनते हैं, इससे राष्ट्र के स्वरूप पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई यह कहे कि किसी विशेष रंग के कपड़े पहनने से देश हिंदू राष्ट्र बन जाएगा, तो वे उसे भी अपनाने को तैयार हैं, लेकिन वस्त्रों या बाहरी रूप-रंग से कोई बदलाव नहीं आता।

उन्होंने कहा कि असली मुद्दा समाज की सोच और एकता का है। आज कई लोग यह महसूस कर रहे हैं कि हिंदू समाज खुद को कमजोर और सीमित होता हुआ देख रहा है, लेकिन इस सोच से बाहर निकलने की आवश्यकता है।

साध्वी सरस्वती दीदी ने अपने संबोधन में चार पंक्तियों के माध्यम से संदेश दिया—
“हिंदुओं को कोई भी छोटा न समझे,
इरादे हमारे विध्वंसक नहीं हैं,
अकारण युद्ध के हम भी प्रशंसक नहीं हैं,
अहिंसा के हम सच्चे पुजारी हैं,
पर अहिंसक हैं, हम नपुंसक नहीं हैं।”

उन्होंने कहा कि ‘नेटवर्क 10’ द्वारा आयोजित यह चौथा संत संसद कार्यक्रम समाज को एक मजबूत संदेश देता है कि संत समाज के इरादे रचनात्मक हैं, न कि विनाशकारी। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने “भारत माता की जय” के उद्घोष के साथ सभी का आभार व्यक्त किया और ‘नेटवर्क 10’ को इस आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।