नयी दिल्ली, 15 अप्रैल (भाषा) वर्ष 2025 में फिरौती के मकसद से किए जाने वाले साइबर हमलों (रैनसमवेयर) से प्रभावित अधिकांश भारतीय कंपनियों ने औसतन 12 करोड़ रुपये (करीब 13.5 लाख डॉलर) से अधिक की फिरौती चुकाई। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
साइबर सुरक्षा कंपनी चेक पॉइंट सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रैनसमवेयर हमलों से प्रभावित भारतीय कंपनियों में से 65 प्रतिशत ने अपना डेटा बचाने के लिए फिरौती का भुगतान किया।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में देश की 201 कंपनियां इस तरह के साइबर हमलों की चपेट में आईं।
रिपोर्ट कहती है, ‘‘भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में रैनसमवेयर गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है, जहां विशेष रूप से विनिर्माण क्षेत्र की कंपनियों पर हमलों की संख्या और प्रभाव में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।’’
वैश्विक स्तर पर देखें तो वर्ष 2024 के 937 मामलों के मुकाबले 2025 में विनिर्माण क्षेत्र पर रैनसमवेयर हमले 56 प्रतिशत बढ़कर 1,466 हो गए।
रिपोर्ट के अनुसार, हमलावर अब केवल डेटा चोरी के बजाय परिचालन बाधित करने और आपूर्ति शृंखला पर दबाव बनाने की रणनीति पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।
हालांकि, अमेरिका में सबसे अधिक 713 घटनाएं दर्ज की गईं लेकिन 201 मामलों के साथ भारत भी उच्च स्तर पर निशाना बनाए जाने वाले देशों में शामिल है।
रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोप और ब्रिटेन में भी इसी तरह के रुझान देखे गए हैं, जहां विनिर्माण क्षेत्र पर हमलों से वाहन, वैमानिकी और लॉजिस्टिक जैसे क्षेत्रों में व्यापक असर पड़ा है।
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