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नयी दिल्ली, 15 अप्रैल (भाषा) होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के मद्देनजर, भारत ने व्यापारिक जहाजों के निर्बाध आवागमन का बुधवार को आह्वान किया। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जोर दिया कि जहाजों पर हमले ‘‘पूरी तरह से अस्वीकार्य’’ हैं।
पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर ईंधन आपूर्ति में व्यवधानों पर केंद्रित जापान में आयोजित एक बैठक में अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा कि वैश्विक विकास के लिए ऊर्जा बाजारों को खुला रखा जाए।
विदेश मंत्री ने डिजिटल माध्यम से आयोजित ‘‘एशिया जीरो-एमिशन कम्युनिटी (एजेडईसी) प्लस’’ बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। बैठक की अध्यक्षता जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने की।
जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा, ‘‘समुद्री जहाजों के सुरक्षित और निर्बाध आवागमन के प्रति भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता पर जोर दिया गया। व्यापारिक जहाजों पर हमले पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। वैश्विक विकास के लिए ऊर्जा बाजारों को खुला रखा जाए।'
उन्होंने कहा, ‘‘एक प्रमुख ऊर्जा उपभोक्ता के रूप में, भारत समान विचारधारा वाले साझेदारों के साथ मिलकर आपूर्ति शृंखला को मजबूत बनाने के लिए काम करेगा।’’
बैठक में ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर सहित एजेडईसी के 11 सदस्य देशों और समूह के सहयोगी देशों भारत, बांग्लादेश और दक्षिण कोरिया ने भाग लिया।
बैठक में, जापान ने ईंधन आपूर्ति की कमी और आपूर्ति शृंखला में व्यवधान से प्रभावित एशियाई देशों को वित्तीय सहयोग प्रदान करने के लिए ‘पार्टनरशिप ऑन वाइड एनर्जी एंड रिसोर्सेज रेजिलिएंस’ (पावर) एशिया नामक एक नयी पहल शुरू की।
जापान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि लगभग 10 अरब अमेरिकी डॉलर की वित्तीय सहायता का इस्तेमाल राजकोषीय सहायता प्रदान करने, ऊर्जा आपूर्ति प्रणालियों को मजबूत करने और ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने के लिए किया जाएगा।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘इस ढांचे का उद्देश्य एशिया में कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद के वित्तपोषण और आपूर्ति शृंखला को बनाए रखने के साथ-साथ भंडारण और निकासी प्रणालियों की स्थापना और भंडारण टैंकों के निर्माण और उपयोग जैसे संरचनात्मक उपायों को संबोधित करके आपातकालीन प्रतिक्रियाओं में सहयोग करना है।’’
ताकाइची ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से ईंधन और अन्य संसाधनों की आपूर्ति में व्यवधान से सबसे अधिक प्रभावित देश एशिया में हैं, और इस साझा चुनौती का सामना करने के लिए उन्हें मिलकर काम करना आवश्यक है।
भाषा आशीष नरेश
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