नयी दिल्ली, 15 अप्रैल (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय प्रशासन ने पुलिस को आबकारी नीति मामले में आम आदमी पार्टी (आप) प्रमुख अरविंद केजरीवाल की याचिका से संबंधित अदालती कार्यवाही की अनधिकृत रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया से हटाने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया है।
वहीं, एक शिकायत में क्लिप साझा करने वाले पार्टी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
अधिवक्ता वैभव सिंह ने केजरीवाल और अन्य लोगों के खिलाफ अनधिकृत रूप से वीडियो रिकॉर्ड करने और प्रसारित करने के आरोप में रजिस्ट्रार जनरल को अपनी शिकायत बुधवार को प्रस्तुत की। हालांकि उन्हें सूचित किया गया कि उच्च न्यायालय ने पहले ही वीडियो का संज्ञान ले लिया है और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सामग्री को हटाने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया है।
केजरीवाल सोमवार को न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में पेश हुए और आबकारी नीति मामले में उन्हें और अन्य आरोपियों को आरोप मुक्त किये जाने के निचली अदालत के आदेश के खिलाफ सीबीआई की अपील की सुनवाई से न्यायमूर्ति को अलग होने की अपनी याचिका पर दलीलें पेश कीं।
वैभव सिंह ने केजरीवाल के अलावा, आम आदमी पार्टी के नेताओं मनीष सिसोदिया, सौरभ भारद्वाज, संजय सिंह, संजीव झा, मुकेश अहलावत और अन्य के साथ-साथ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के खिलाफ भी अदालत की कार्यवाही के क्लिप सोशल मीडिया पर साझा करने के लिए कार्रवाई करने का अनुरोध किया।
एक अन्य वकील ने भी अदालती कार्यवाही का वीडियो प्रसारित करने के संबंध में मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति अनीश दयाल की पीठ के समक्ष तत्काल सुनवाई के लिए अपनी याचिका का उल्लेख किया।
मुख्य न्यायाधीश उपाध्याय ने हालांकि तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए कहा, ‘‘आपने याचिका दायर की है, इसे सूचीबद्ध किया जाएगा। इसमें इतनी जल्दी क्या है?’’
वैभव सिंह ने अपनी शिकायत में कहा कि न्यायिक कार्यवाही के वीडियो/ऑडियो को साझा करना उच्च न्यायालय के नियमों के तहत प्रतिबंधित है और आरोप लगाया कि नेताओं का आचरण ‘‘न्यायाधीश पर दबाव बनाने’’ की कोशिश थी।
भाषा धीरज नरेश
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