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महिला आरक्षण विधेयक से उत्तर और दक्षिण में पैदा हो सकता है भावनात्मक विभाजन: कांग्रेस नेता

मुंबई, 15 अप्रैल (भाषा) महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता अनंत गाडगिल ने बुधवार को 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे उत्तरी और दक्षिणी राज्यों के बीच 'भावनात्मक विभाजन' हो सकता है और उन्होंने इस कानून को लाने में केंद्र सरकार की जल्दबाजी पर भी सवाल उठाया।

आगामी जनगणना का जिक्र करते हुए गाडगिल ने एक बयान में कहा कि रिपोर्ट 2027 तक तैयार होने की उम्मीद है और संविधान में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य वर्गों के लिए पर्याप्त प्रतिनिधित्व का प्रावधान पहले से ही मौजूद है।

संसद का तीन दिवसीय एक विशेष सत्र 16 से 18 अप्रैल तक बुलाया गया है, जिसके दौरान 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (जिसे आमतौर पर महिला आरक्षण अधिनियम के रूप में जाना जाता है) में संशोधन पेश किए जाएंगे ताकि इसे 2029 में लागू किया जा सके।

गाडगिल ने जानना चाहा कि सरकार अद्यतन आंकड़ों की प्रतीक्षा करने के बजाय एक दशक से अधिक पुराने आंकड़ों के आधार पर 29 अप्रैल से पहले विधेयक को क्यों आगे बढ़ा रही है।

उन्होंने इसे 'सोची-समझी चाल' बताते हुए दावा किया कि प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया के परिणामस्वरूप उत्तरी राज्यों के लिए लोकसभा सीट में वृद्धि और दक्षिणी राज्यों के लिए सीट में इसी अनुपात में कमी हो सकती है, जिससे महाराष्ट्र का राजनीतिक महत्व भी कम हो सकता है।

गाडगिल ने परिणामों की चेतावनी देते हुए कहा कि यदि संसदीय प्रतिनिधित्व उत्तर में असमान रूप से अधिक और दक्षिण में कम हो जाता है तो समय के साथ यह देश में भावनात्मक उत्तर-दक्षिण विभाजन को जन्म दे सकता है।

भाषा

शुभम रंजन

रंजन