नयी दिल्ली, 15 अप्रैल (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने हरियाणा के शिकोहपुर में जमीन के सौदे से जुड़े धन शोधन मामले में कारोबारी रॉबर्ट वाद्रा के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दाखिल आरोप पत्र का बुधवार को संज्ञान लिया।
ईडी ने पिछले साल जुलाई में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाद्रा के पति रॉबर्ट वाद्रा और 10 अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।
यह पहली बार था जब किसी जांच एजेंसी ने रॉबर्ट वाद्रा (57) के खिलाफ आपराधिक मामले में आरोपपत्र दाखिल किया था। अप्रैल 2025 में, ईडी ने वाद्रा से लगातार तीन दिन तक पूछताछ की थी।
विशेष न्यायाधीश सुशांत चांगोत्रा ने कहा कि आरोपपत्र और दस्तावेजों की प्रथम दृष्टया व्यापक जांच से वाद्रा और आठ अन्य आरोपियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई के लिए पर्याप्त सामग्री सामने आई है।
न्यायाधीश ने उन्हें 16 मई को तलब करते हुए कहा, ‘‘मैं धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा तीन (धन शोधन) और धारा 70 (कंपनियों द्वारा किए गए अपराध) के तहत किए गए अपराधों का संज्ञान लेता हूं, जो अधिनियम की धारा 4 के तहत दंडनीय हैं।
न्यायाधीश ने वाद्रा, केवल सिंह विर्क, स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड (अब स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी एलएलपी), स्काई लाइट रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड, रियल अर्थ एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड (अब रियल अर्थ एस्टेट्स एलएलपी) और ब्लू ब्रीज ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड (अब ब्लू ब्रीज ट्रेडिंग एलएलपी) को समन जारी किए।
नॉर्थ इंडिया आईटी पार्क्स प्राइवेट लिमिटेड (अब नॉर्थ इंडिया आईटी पार्क्स एलएलपी), लंबोदर आर्ट एंटरप्राइजेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (अब लंबोदर आर्ट एंटरप्राइजेज इंडिया एलएलपी) और एसजीवाई प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड (जिसे पहले ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड के नाम से जाना जाता था) के खिलाफ भी समन जारी किया गया है।
न्यायाधीश ने कहा कि संज्ञान लेने के लिए आवश्यक मापदंड, आरोप तय करने के चरण में आवश्यक मापदंड से भिन्न होते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘इस चरण में जांच का दायरा बहुत सीमित है और इसे केवल अभियोजन की शिकायत में किए गए आरोपों और उससे संलग्न दस्तावेजों की जांच तक ही सीमित रहना आवश्यक है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मामले को आगे बढ़ाने के पर्याप्त आधार मौजूद हैं।’’
अदालत ने यह भी कहा कि आरोपियों में से एक सत्यानंद याजी को तलब नहीं किया जा सकता क्योंकि उसके खिलाफ आगे बढ़ने के लिए कोई सबूत नहीं है।
अदालत ने बचाव पक्ष के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि उसे अपराध में आरोप तय होने तक मामले को स्थगित कर देना चाहिए।
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘इस तथ्य के बावजूद कि अपराध के संबंध में आरोपपत्र अभी दाखिल नहीं किया गया है और यह अभी भी जांच के अधीन है, अदालत के लिए अभियोजन की शिकायत के साथ आगे बढ़ने पर कोई कानूनी रोक नहीं है।’’
वाद्रा के खिलाफ जांच हरियाणा के गुरुग्राम जिले के मानेसर-शिकोहपुर (वर्तमान सेक्टर 83) में हुए एक भूमि सौदे से जुड़ी है।
यह सौदा फरवरी 2008 में स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी द्वारा किया गया था, जिसमें वाद्रा पहले निदेशक थे। इस सौदे के तहत कंपनी ने शिकोहपुर में ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से 3.5 एकड़ जमीन 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी थी।
उस समय हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी। चार साल बाद, सितंबर 2012 में कंपनी ने वह जमीन रियल एस्टेट क्षेत्र की कंपनी डीएलएफ को 58 करोड़ रुपये में बेच दी।
अक्टूबर 2012 में यह सौदा विवादों में घिर गया, जब उस समय भूमि समेकन और भूमि अभिलेख के महानिदेशक-सह-पंजीकरण महानिरीक्षक के पद पर तैनात आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने लेनदेन को राज्य समेकन अधिनियम और कुछ संबंधित प्रक्रियाओं का उल्लंघन करार देते हुए जमीन की दाखिल-खारिज रद्द कर दी।
वाद्रा ने किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से इनकार किया और इस मामले को अपने और अपने परिवार के खिलाफ ‘‘राजनीतिक प्रतिशोध’’ बताया।
भाषा आशीष सुभाष
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