चेन्नई/नयी दिल्ली, 15 अप्रैल (भाषा)देश भर में विपक्षी दलों ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग)सरकार से परिसीमन को लेकर सवाल उठाए और प्रस्तावित परिसीमन पर चिंता जताई।
दक्षिण के गैर-भाजपा मुख्यमंत्रियों ने भी एकजुट होकर अपने-अपने राज्यों के हितों को लेकर चिंता जताई है। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने घोषणा की कि विपक्ष ने संसद में प्रस्तावित संशोधनों के खिलाफ मतदान करने का संकल्प लिया है।
तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया के खिलाफ 16 अप्रैल को पूरे राज्य में काले झंडे दिखाकर प्रदर्शन की घोषणा की और केंद्र को चेतावनी दी कि यदि उसने दक्षिणी राज्य की आवाज पर ध्यान नहीं दिया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे और ‘‘भारी कीमत’’ चुकानी पड़ेगी।
विपक्षी नेताओं ने आम सहमति की कमी और सत्र के समय को लेकर चिंता जताई।
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर हुई विपक्षी दलों की बैठक में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन और परिसीमन संबंधी विधेयक पर विस्तार से चर्चा की गई तथा ‘‘सर्वसम्मति से’’ यह फैसला किया गया कि वे परिसीमन के प्रावधानों के खिलाफ एकजुट होकर वोट करेंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘हम सभी महिला आरक्षण विधेयक के पक्ष में हैं, लेकिन इसे जिस तरीके से पेश किया जा रहा है, उस पर हमें आपत्ति है। यह राजनीतिक रूप से प्रेरित है। विपक्षी दलों को चुप कराने और दबाने के लिए सरकार ऐसा कर रही है..।’’
खरगे ने विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक के बाद कहा, ‘‘हम लगातार महिला आरक्षण का समर्थन कर रहे हैं। हम पहले पारित संशोधन को लागू करने पर जोर दे रहे हैं। वे (भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार) परिसीमन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इसलिए, सभी दलों ने एकजुट होकर इस विधेयक का विरोध करने का निर्णय लिया है।’’
द्रमुक अध्यक्ष स्टालिन ने परिसीमन के विषय पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पार्टी सांसदों और पार्टी जिला सचिवों की एक आपात बैठक की अध्यक्षता करने के बाद कहा, ‘‘हमारे सिर पर लटकी तलवार अब हम पर आ गिरी है।’’
उन्होंने कहा कि द्रमुक सभी राज्यों के सांसदों से संपर्क साध रही है और इस ‘‘गंभीर खतरे’’ का मुकाबला करने के लिए समन्वित रणनीति तैयार कर रही है।
एक बयान में स्टालिन ने आरोप लगाया कि केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा बृहस्पतिवार को संसद में लाया जाने वाला परिसीमन संशोधन तमिलनाडु और दक्षिणी राज्यों के खिलाफ एक ‘‘घोर ऐतिहासिक अन्याय’’ है।
उन्होंने आरोप लगाया कि परिसीमन की प्रक्रिया दक्षिणी राज्यों के खिलाफ है। उन्होंने पूछा कि क्या परिसीमन प्रक्रिया ‘‘भारत की प्रगति में योगदान देने की सजा है? उन्होंने यह पूछा, ‘‘क्या तमिलनाडु और दक्षिणी राज्यों को इस तरह से इनाम दिया जा रहा है?’’
परिसीमन के खिलाफ समर्थन जुटाने के अपने प्रयासों के तहत स्टालिन ने पिछले साल यहां गैर-भाजपा शासित राज्यों की एक बैठक बुलाई थी और केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, पंजाब एवं तेलंगाना के उनके समकक्ष भगवंत मान और ए रेवंत रेड्डी तथा कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार सहित अन्य लोगों ने इस बैठक में भाग लिया था।
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने केंद्र सरकार की प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताते हुए बुधवार को आरोप लगाया कि इससे देश के संघीय ढांचे के कमजोर होने की आशंका है और केरल जैसे राज्यों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
विजयन ने कहा कि संसद के बजट सत्र की विस्तारित बैठक में 2011 की जनगणना पर आधारित प्रस्तावित विधेयक राज्यों के अधिकारों और न्यायसंगत न्याय के सिद्धांत को काफी हद तक प्रभावित करेगा। उन्होंने कहा कि यह भी चिंताजनक है कि केंद्र राज्यों के साथ सहमति बनाए बिना इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर आगे बढ़ रहा है।
तृणमूल कांग्रेस ने भी परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार पर हमला किया। परिसीमन के बाद सरकार की मंशा लोकसभा की मौजूदा सीट की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने की है।
तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ'ब्रायन ने बुधवार को आरोप लगाया कि सरकार महिलाओं के आरक्षण की आड़ में परिसीमन लागू करने की ‘कुटिल साजिश’ को अंजाम दे रही है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को निशाना बनाते हुए आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण को बहाने के तौर पर इस्तेमाल कर रही है।
तृणमूल सांसद ने कहा, ‘‘परिसीमन कुटिल एजेंडा है, महिलाओं का तो बहाना है।’’ उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल ने ‘‘महिलाओं की कभी भी परवाह ही नहीं की।’’
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, ‘‘संविधान का मजाक उड़ाओ, संसद का मजाक उड़ाओ और इस महान राष्ट्र की महिलाओं का मजाक उड़ाओ।’’
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से आग्रह किया कि वह दक्षिणी राज्यों द्वारा उठाई गई परिसीमन की चिंताओं पर गंभीरता से ध्यान दें, अन्यथा यह मुद्दा संवेदनशील रूप ले सकता है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि केंद्र द्वारा प्रस्तावित परिसीमन से दक्षिणी राज्यों की आवाजें ‘दब’ जाएंगी।
उन्होंने 16 अप्रैल से संसद सत्र आयोजित किए जाने को ‘‘सुनियोजित साजिश’’ करार देते हुए कहा कि इसका उद्देश्य चुनाव प्रचार में व्यस्त तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के सांसदों को सत्र में भाग लेने से रोकना है।
चिदंबरम ने कांग्रेस द्वारा इन दोनों राज्यों में चुनावों का हवाला देते हुए सत्र स्थगित करने के अनुरोध का जिक्र करते हुए पूछा, ‘‘चुनावों के बाद संसद सत्र आयोजित करने में क्या खतरा है?’’
तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के अध्यक्ष विजय ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र से संविधान (131वां संशोधन) विधेयक वापस लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि विधेयक संसद में दक्षिणी राज्यों, विशेष रूप से तमिलनाडु के लोगों की आवाज को कम करने की दिशा में एक ‘‘पक्षपातपूर्ण कार्रवाई’’ होगी।
शिवसेना (उबाठा) के नेता संजय राउत ने लोकसभा सीटों के परिसीमन के मुद्दे को विवादास्पद करार देते हुए कहा कि बिना जनगणना के किया जा रहा यह कार्य गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है और दक्षिण भारतीय राज्य इसका पुरजोर विरोध करेंगे।
राउत ने कहा कि उनकी पार्टी के पास 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' या महिला आरक्षण कानून का विरोध करने का कोई कारण नहीं है, जिसे केंद्र सरकार जल्द लागू करने की योजना बना रही है।
उन्होंने कहा कि शिवसेना (उबाठा) ने महिलाओं के चुनावी हितों में कभी बाधा नहीं डाली है और न ही कभी डालेगी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र स्थानीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण देने वाला पहला राज्य था।
राउत ने कहा, “यह परिसीमन ही है जो देश में गंभीर स्थिति पैदा करेगा। परिसीमन का मुद्दा विवादास्पद है और यह जनगणना कराए बिना किया जा रहा है।”
ओडिशा की मुख्य विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने राज्य के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से परिसीमन विधेयक में राज्य के हितों की रक्षा के तरीकों पर चर्चा करने के लिए ‘‘48 घंटों के भीतर’’ विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की अपील की। हालांकि, उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक का स्वागत किया।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा पर महिला आरक्षण के मुद्दे पर 'जल्दबाजी' करके जनगणना को टालने की नीयत रखने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक दरअसल पीडीए (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग) का हक मारने की एक 'बड़ी साजिश' का हिस्सा है।
उन्होंने कहा, ''अब हर तरह से भाजपा की कलई खुल गयी है, इसीलिए उसके समर्थक और वोटरों का अकाल पड़ गया है। भाजपा निराशा के इस दौर से उबरने के लिए यह (महिला आरक्षण) विधेयक ला रही है।''
तेलंगाना में विपक्षी भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने कहा कि वह महिला आरक्षण संशोधन विधेयक का समर्थन करेगी, लेकिन परिसीमन से इसे जोड़ने का विरोध करती है।
बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के टी रामाराव ने हैदराबाद में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘महिलाओं के लिए आरक्षण तुरंत लागू करें। संसद (लोकसभा) में 543 सीट हैं। इसे वहां लागू करें। तेलंगाना की विधानसभा में 119 सीट हैं। इसे यहां भी लागू करें। सीट की संख्या में वृद्धि और परिसीमन से जोड़कर भ्रम क्यों पैदा किया जा रहा है?’’
रामा राव ने कहा कि संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार, क्रम का ठीक से पालन किया जाना चाहिए, पहले जनगणना, फिर परिसीमन, और उसके बाद ही कोई संरचनात्मक परिवर्तन किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बीआरएस किसी भी ऐसे उचित प्रस्ताव का समर्थन करेगी जिससे दक्षिणी राज्यों के हितों को नुकसान न पहुंचे, और उन्होंने चेतावनी दी कि दक्षिण भारत को नुकसान पहुंचाने के किसी भी प्रयास का कड़ा विरोध किया जाएगा, जिसमें जरूरत पड़ने पर विरोध प्रदर्शन भी शामिल हैं।
भाषा धीरज नरेश
नरेश