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भारत में अब नक्सल हिंसा प्रभावित कोई जिला नहीं: गृह मंत्रालय ने राज्य सरकारों को सूचित किया

(नीलाभ श्रीवास्तव)

नयी दिल्ली, 15 अप्रैल (भाषा) केंद्र ने राज्य सरकारों को सूचित किया है कि भारत में वामपंथी उग्रवाद के पांच दशक से अधिक समय के बाद देश में अब कोई भी नक्सली हिंसा प्रभावित जिला नहीं है।

यह घोषणा गृह मंत्रालय द्वारा इस महीने की शुरुआत में आयोजित उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा के बाद की गई, जो ‘वामपंथी उग्रवाद से निपटने के लिए 2015 में तैयार की गई राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना के तहत की गई थी।

अधिकारियों ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि गृह मंत्रालय ने आठ अप्रैल को नौ राज्यों को जारी एक आधिकारिक संचार में कहा कि 31 मार्च के बाद पूरी हुई व्यापक सुरक्षा समीक्षा से यह स्थापित हुआ है कि ‘‘देश का कोई भी जिला वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित श्रेणी में नहीं आता है।’’

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 30 मार्च को संसद को सूचित किया था कि भारत माओवादियों से मुक्त है।

उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक भारत में वामपंथी उग्रवाद को समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित समयसीमा 31 मार्च को समाप्त हो जाने के मद्देनजर की गई थी।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘भारत का नक्सली हिंसा से मुक्त होना केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों के निरंतर और समन्वित प्रयासों से प्राप्त एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।’’

इस तरह की आखिरी सुरक्षा समीक्षा बैठक 27 मार्च को की गई थी जिसमें छत्तीसगढ़ के बीजापुर और झारखंड के पश्चिम सिंहभूम, दो जिलों को वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया था।

गृह मंत्रालय ने अपने नवीनतम पत्र में आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल को सूचित किया है कि 37 जिलों को ‘‘विरासत और विकास जिलों’’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है जबकि एक जिले को ‘‘चिंताजनक जिला’’ घोषित किया गया है।

गृह मंत्रालय ने कहा कि यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि इन 38 जिलों को सुरक्षा और विकास प्रयासों में निरंतरता की आवश्यकता है क्योंकि ये जिले कई वर्षों से वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित थे।

‘‘विरासत और विकास जिला’’ वह जिला है जो नक्सली हिंसा से पूरी तरह मुक्त है।

‘‘चिंताजनक जिला’’ वह जिला है जहां नक्सली हिंसा पर नियंत्रण पा लिया गया है और उनकी संगठनात्मक संरचना को नष्ट कर दिया गया है, लेकिन निकट भविष्य में निरंतर सुरक्षा और विकास की आवश्यकता है।

झारखंड का पश्चिम सिंहभूम जिला 31 मार्च के बाद एकमात्र ‘‘चिंताजनक जिले’’ के रूप में सूचीबद्ध है।

नक्सलवाद की चिंगारी साल 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी से भड़की थी।

आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, वामपंथी उग्रवाद से जुड़ी हिंसा में आम नागरिकों और सुरक्षाबलों के कर्मियों समेत 17,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

भाषा

देवेंद्र नेत्रपाल

नेत्रपाल