नयी दिल्ली, 15 अप्रैल (भाषा) भारतीय नौसेना के शीर्ष कमांडरों ने एक महत्वपूर्ण सम्मेलन में समुद्री सुरक्षा चुनौतियों की समीक्षा की और देश की ऊर्जा रक्षा के संदर्भ में पश्चिम एशिया संकट के प्रभावों का आकलन किया।
प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने नौसेना कमांडरों के साथ बदलती भू-राजनीतिक स्थिति से संबंधित मुद्दों पर बात की और नौसेना से आर्थिक एवं तकनीकी कारकों सहित युद्ध के तेजी से विकसित हो रहे स्वरूप के लिए योजना बनाने को कहा।
नौसेना कमांडरों का द्विवार्षिक सम्मेलन मंगलवार को नयी दिल्ली में शुरू हुआ और यह बृहस्पतिवार तक जारी रहेगा।
नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने अपने संबोधन में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ऊर्जा सुरक्षा सहित भारत के समुद्री हितों की रक्षा में बल की उपलब्धियों की सराहना की।
नौसेना ने कहा कि एडमिरल त्रिपाठी ने उभरते भू-रणनीतिक परिदृश्य में हिंद महासागर क्षेत्र में नौसेना की प्रतिबद्धताओं तथा बहुपक्षीय और द्विपक्षीय अभ्यासों में मित्र विदेशी देशों के साथ सक्रिय जुड़ाव के माध्यम से एक सामंजस्यपूर्ण एवं विश्वसनीय दृष्टिकोण के महत्व को दोहराया।
कमांडरों ने संयुक्तता, क्षमता वृद्धि, रखरखाव, प्रशिक्षण, विदेशी सहयोग और मानव संसाधन एवं स्वदेशीकरण से संबंधित मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया।
माना जाता है कि कमांडरों ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत की ऊर्जा अवसंरचना की सुरक्षा के लिए नौसेना की तैनाती पर भी चर्चा की।
भाषा नेत्रपाल सुभाष
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