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सीबीएसई कक्षा 10वीं के परिणाम: 93.7 प्रतिशत छात्र परीक्षा में उत्तीर्ण हुए

नयी दिल्ली, 15 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने बुधवार को घोषणा की कि कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में 93.70 प्रतिशत से अधिक छात्र उत्तीर्ण हुए, जिनमें से 55,000 से अधिक छात्रों ने 95 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए।

कुल 2.20 लाख से अधिक छात्रों ने 91 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए।

परीक्षा में एक बार फिर लड़कियों ने लड़कों को पीछे छोड़ दिया है। इस बार 94.99 प्रतिशत छात्राएं परीक्षा में उत्तीर्ण हुई हैं। लड़कों का उत्तीर्ण प्रतिशत 92.69 रहा और उभयलिंगी अभ्यर्थियों का उत्तीर्ण प्रतिशत 87.50 रहा।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) की सिफारिशों के अनुरूप, सीबीएसई ने कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा दो चरणों में आयोजित करना शुरू किया है। पहली परीक्षा फरवरी-मार्च में आयोजित की गई और दूसरी मई में निर्धारित है। छात्रों के लिए पहली परीक्षा में शामिल होना अनिवार्य था।

सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने कहा, 'परंपरागत रूप से, कक्षा 10वीं के परिणाम मई के मध्य में घोषित किए जाते हैं। हालांकि, इस वर्ष सीबीएसई ने रिकॉर्ड समय में लगभग 1.6 करोड़ उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया और परिणाम सामान्य से एक महीने पहले घोषित किया जा रहा है।'

उन्होंने कहा, 'परिणाम घोषित होने के बाद, छात्रों को अपने-अपने विद्यालयों के माध्यम से दूसरी परीक्षा के लिए अपना नामांकन दर्ज कराने के लिए कहा जाएगा।'

सीबीएसई के अनुसार, 55,368 छात्रों ने 95 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए हैं, जबकि 2,21,574 छात्रों ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए। 1.47 लाख से अधिक अभ्यर्थियों को ‘कम्पार्टमेंट’ श्रेणी में रखा गया है।

क्षेत्रवार, त्रिवेंद्रम और विजयवाड़ा क्षेत्रों ने 99.79 प्रतिशत के साथ सर्वाधिक उत्तीर्ण प्रतिशत दर्ज किया, जबकि गुवाहाटी क्षेत्र का उत्तीर्ण प्रतिशत सबसे कम 85.32 प्रतिशत रहा। दिल्ली का उत्तीर्ण प्रतिशत 97.38 प्रतिशत दर्ज किया गया।

संस्थानवार, केंद्रीय विद्यालयों का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा, जहां उत्तीर्ण प्रतिशत 99.57 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके बाद नवोदय विद्यालय 99.42 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रहे। निजी स्कूलों का उत्तीर्ण प्रतिशत 93.77 प्रतिशत रहा, जबकि सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों का उत्तीर्ण प्रतिशत सबसे कम 91.01 प्रतिशत दर्ज किया गया।

सीबीएसई के अनुसार, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) का उत्तीर्ण प्रतिशत 96.24 रहा, जिनमें से कम से कम 91 छात्रों ने 95 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए, जबकि इस श्रेणी के 452 छात्रों ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए।

बोर्ड के पहले के निर्णय के अनुसार छात्रों के बीच प्रतिस्पर्धा से बचने के लिए सीबीएसई ने कोई मेरिट सूची घोषित नहीं की है। साथ ही, बोर्ड ने अपने छात्रों को प्रथम, द्वितीय या तृतीय श्रेणी भी प्रदान नहीं की।

उन्होंने कहा, “हालांकि, हम उन शीर्ष 0.1 प्रतिशत छात्रों को मेरिट प्रमाण पत्र जारी करेंगे, जिन्होंने विषयों में सर्वाधिक अंक प्राप्त किए हैं। मेरिट प्रमाण पत्र दूसरे बोर्ड परीक्षा के बाद संबंधित छात्र के डिजी-लॉकर में उपलब्ध कराया जाएगा।”

बोर्ड ने पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न परिस्थितियों के मद्देनजर जहां परीक्षाएं रद्द कर दी गई थीं, वहां परीक्षा देने वाले छात्रों के परिणाम भी घोषित किए। इन छात्रों के लिए सीबीएसई ने वैकल्पिक अंक निर्धारण नीति की घोषणा की थी।

भारद्वाज ने कहा, “पश्चिम एशियाई देशों में मौजूदा स्थिति को देखते हुए सीबीएसई ने इस क्षेत्र के छात्रों के परिणाम अन्य छात्रों के साथ ही जारी करने का निर्णय लिया है, ताकि सीबीएसई की नीति के अनुरूप निष्पक्षता और समानता सुनिश्चित की जा सके।”

विदेशी स्कूलों का उत्तीर्ण प्रतिशत 99.10 दर्ज किया गया।

इस बार 24.71 लाख से अधिक अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए, जो 8,074 केंद्रों पर आयोजित की गई। 21 फरवरी को सीबीएसई ने 24.95 लाख अभ्यर्थियों की परीक्षा आयोजित की। इस दिन 10 लाख से अधिक कक्षों और 20 लाख पर्यवेक्षकों की तैनाती की गई।

भाषा

राखी माधव

माधव