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महिलाओं के लिए आरक्षण राजनीतिक क्रांति की दिशा में एक कदम: गुजरात के मुख्यमंत्री

गांधीनगर, 15 अप्रैल (भाषा) गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बुधवार को गांधीनगर में कहा कि 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' केवल महिलाओं के लिए आरक्षण प्रदान करने वाला कानून नहीं है, बल्कि राजनीतिक क्षेत्र में क्रांति लाने की दिशा में एक कदम है।

उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने भी अहमदाबाद में नारी शक्ति अधिनियम (जिसे आमतौर पर महिला आरक्षण अधिनियम के रूप में जाना जाता है) पर एक कार्यक्रम के दौरान एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि महिलाओं के लिए आरक्षण आने वाली पीढ़ियों को लाभ पहुंचाएगा।

पटेल ने गांधीनगर में इस अधिनियम से संबंधित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल महिलाओं के लिए आरक्षण प्रदान करने वाला कानून नहीं है, बल्कि राजनीतिक क्षेत्र में क्रांति लाने की दिशा में एक कदम है।'

उन्होंने कहा कि संसद का विशेष सत्र 16 अप्रैल से 18 अप्रैल तक बुलाया जाएगा।

पटेल ने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में संसद के दोनों सदनों ने 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया, जो भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक स्वर्णिम और क्रांतिकारी कदम है। प्रधानमंत्री मोदी से प्रेरणा लेकर संसद का विशेष सत्र आयोजित किया गया है।'

अहमदाबाद में उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने एक सभा को संबोधित किया, जहां उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम की सराहना की।

उन्होंने कहा, 'जब एक महिला प्रतिनिधि होती है तो लोकसभा में महिलाओं से संबंधित मुद्दों को उनके पक्ष में मजबूती से उठाया जाएगा।'

उन्होंने कहा कि जब भी आरक्षण के विषय पर बात होती है, तो दिल्ली के कुछ लोग कहते हैं कि यह आरक्षण के बजाय मेरिट के आधार पर होना चाहिए।

उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा, “अगर राहुल गांधी की बहन प्रियंका गांधी लोकसभा की सदस्य हो सकती हैं, अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव भी सांसद हो सकती हैं, और लालू प्रसाद की पत्नी राबड़ी देवी जन प्रतिनिधि हो सकती हैं, तो आम महिलाएं क्यों नहीं?”

उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण भावी पीढ़ियों के लिए लाभकारी होगा।

भाषा

शुभम नरेश

नरेश