(तस्वीरों के साथ)
कोलकाता, 15 अप्रैल (भाषा) पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि ने राज्य की खोई प्रतिष्ठा को फिर से हासिल करने के लिए बुधवार को सामूहिक प्रयास का आह्वान किया। उन्होंने साथ ही लोगों से, खासकर युवाओं से सकारात्मक बदलाव में भागीदारी कर राज्य की ताकत को पुनर्स्थापित करने की अपील की।
रवि ने लोक भवन में ‘पोइला बोइशाख’ (बांग्ला नव वर्ष) के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल कभी देश के अग्रणी आर्थिक और बौद्धिक केंद्रों में शुमार था, लेकिन सथ ही राज्य की मौजूदा आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति पर चिंता जताई।
उन्होंने कहा, “स्वतंत्रता के समय और उसके बाद के दशकों में बंगाल देश की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल था। 1960 के दशक में राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में इसका योगदान 10 प्रतिशत से भी अधिक था। उस दौर में न तमिलनाडु, न कर्नाटक और न ही गुजरात इस तरह उभरकर सामने आए थे। यह उद्योग, उद्यम, बौद्धिकता और सांस्कृतिक जीवंतता से परिपूर्ण एक समृद्ध भूमि थी।’’
दशकों में आए बदलावों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “1980 तक केवल चार राज्यों की प्रति व्यक्ति आय बंगाल से अधिक थी, लेकिन आज ऐसे राज्यों की संख्या बढ़कर 15 हो गई है। राष्ट्रीय आय में पश्चिम बंगाल की हिस्सेदारी 10.6 प्रतिशत से घटकर करीब पांच प्रतिशत रह गई है।”
राज्यपाल ने कहा, “पोइला बोइशाख 2026 संकल्प का दिन है। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हमें अपना सर्वश्रेष्ठ देना होगा। निराशा कोई विकल्प नहीं है।”
उन्होंने कहा, “पश्चिम बंगाल को जागना होगा और अपनी ऊर्जा व विरासत को फिर से हासिल करना होगा। यह मां दुर्गा की भूमि है। हम इसे पुनः गौरव दिलाएंगे।”
राज्यपाल ने विश्वास जताया कि राज्य अपनी पुरानी पहचान फिर हासिल करेगा और भारत की वैश्विक विकास यात्रा में अग्रणी भागीदार बनेगा।
भाषा
खारी धीरज
धीरज