इंदौर, 15 अप्रैल (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में हिंदू पक्ष के एक याचिकाकर्ता ने बुधवार को दावा किया कि धार के विवादित भोजशाला परिसर की बनावट परमार राजवंश के राजा भोज की लिखी पुस्तक ‘समरांगणसूत्रधार’ में मंदिरों के निर्माण के लिए तय पैमानों से हू-ब-हू मेल खाती है।
याचिकाकर्ता ने 11वीं सदी के इस स्मारक को मूलत: 'सरस्वती मंदिर-सह-संस्कृत अध्ययन केंद्र' बताते हुए अदालत से इसमें केवल हिंदुओं को उपासना का अधिकार देने की गुहार लगायी।
भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह विवादित परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है।
उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ भोजशाला के धार्मिक स्वरूप के विवाद को लेकर दायर चार याचिकाओं और एक रिट अपील पर छह अप्रैल से नियमित सुनवाई कर रही है। सबसे पहले याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनी जा रही हैं।
हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ताओं में एक कुलदीप तिवारी के वकील मनीष गुप्ता ने न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की पीठ के सामने पेश विस्तृत दलीलों में राजा भोज की रचित पुस्तक ‘समरांगणसूत्रधार’ का बार-बार उल्लेख किया।
यह पुस्तक परमारकालीन मंदिरों, मूर्तियों, नगरों, महलों, नगरों और घरों की विशिष्ट वास्तुकला पर आधारित है।
गुप्ता ने भोजशाला परिसर में एएसआई के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट का हवाला दिया और दावा किया कि पत्थर के खंडों से बनी इस इमारत की नींव की ईंटें एवं परिसर के बीचों-बीच स्थित हवनकुंड की ईंटें एक ही भट्ठी की थीं।
उन्होंने कहा,‘‘इसका मतलब है कि परिसर में हवन कुंड शुरुआत से ही मौजूद था। हवन कुंड को समरांगणसूत्रधार पुस्तक में राजा भोज के तय पैमानों के मुताबिक बनाया गया था। इसी तरह, परिसर का प्रवेशद्वार, गर्भगृह आदि भी इन मानकों के मुताबिक बनाये गए थे।’’
गुप्ता ने कहा कि मध्यकालीन भारत के शासक राजा भोज की स्थापित भोजशाला को ऐतिहासिक ग्रंथों में ‘सरस्वती कंठाभरण’ या ‘शारदा सदन’ के रूप में भी संबोधित किया गया है।
उन्होंने कहा कि एएसआई के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट, ऐतिहासिक दस्तावेजों और खुद राजा भोज की पुस्तक से साबित होता है कि भोजशाला परिसर मूलतः सरस्वती मंदिर-सह-संस्कृत अध्ययन केंद्र है जहां विद्वान ज्ञान का आदान-प्रदान भी करते थे।
हिंदू पक्ष के वकील ने कहा,‘‘कानूनी प्रावधानों के मुताबिक किसी जगह एक बार मंदिर स्थापित हो जाए, तो वह जगह हमेशा मंदिर ही रहता है। इसलिए भोजशाला में केवल हिंदुओं को उपासना का अधिकार मिलना चाहिए।’’
गुप्ता ने भोजशाला पर मुस्लिम पक्ष के दावे को खारिज करते हुए कहा कि इस्लाम की शिक्षाओं में बताया गया है कि किसी जगह पर जबरन कब्जा करके वहां मस्जिद नहीं बनाई जा सकती।
उन्होंने अपनी दलीलों के समर्थन में अलग-अलग ऐतिहासिक ग्रंथों के साथ ही 1908 के सरकारी गजट का भी हवाला दिया।
गुप्ता ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद के मुकदमे में उच्चतम न्यायालय के फैसले का उल्लेख किया और कहा कि प्रामाणिक साहित्य और दस्तावेजों को कानूनी मान्यता हासिल है।
भाषा हर्ष राजकुमार
राजकुमार