नयी दिल्ली, 15 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने सुरक्षा घेरा तोड़कर जबरन एसयूवी कार दिल्ली विधानसभा परिसर में ले जाने के आरोपी को बुधवार को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
अदालत ने इससे पहले सात अप्रैल को आरोपी सरबजीत सिंह को आठ दिन की पुलिस हिरासत में भेजा था। पुलिस हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद उसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हर्षिता मिश्रा की अदालत में पेश किया गया।
सरबजीत का पक्ष रखने के लिए पेश हुए अधिवक्ता अंशु शुक्ला ने अपने मुवक्किल की बिगड़ती मानसिक स्वास्थ्य स्थिति का हवाला देते हुए पुलिस हिरासत की अवधि बढ़ाने का विरोध किया। उन्होंने इससे पहले एक अलग मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष दलील दी थी कि सरबजीत लंबे समय से मानसिक रूप से बीमार था और गलती से विधानसभा परिसर में ‘‘गुरुद्वारा समझकर’’ दाखिल हो गया था।
जांच अधिकारी (आईओ) ने अदालत को बताया कि सरबजीत की कथित मानसिक बीमारी का आकलन करने के लिए उसे मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान(इबहास) अस्पताल भेजा गया था। उसे कुछ समय के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया और दवाइयां दी गईं।
अतिरिक्त लोक अभियोजक अतुल श्रीवास्तव ने हिरासत की आवश्यकता बताते हुए दलील दी कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और शिनाख्त परेड लंबित है।
सरबजीत(37) को किसान आंदोलन का समर्थक माना जाता है। उसने सोशल मीडिया मंच पर कई पोस्ट साझा किए हैं जिनमें उन किसान नेताओं के प्रति समर्थन व्यक्त किया गया है जिन्होंने 2020-21 में तीन विवादास्पद लेकिन अब निरस्त कृषि कानूनों के खिलाफ हुए आंदोलन में कथित तौर पर अपनी जान गंवाई थी।
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में पंजीकृत एसयूवी (स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल) छह अप्रैल को अपराह्न करीब दो बजे दिल्ली विधानसभा के गेट नंबर 2 पर लगे अवरोधक को तोड़ते हुए भीतर घुस गया था। वाहन को आरोपी चला रहा था।
भाषा धीरज नरेश
नरेश