प्रयागराज (उप्र), 15 अप्रैल (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव बुधवार को सेवानिवृत्त हुए। मुख्य न्यायाधीश समेत सभी न्यायाधीश उनके विदाई समारोह में शामिल हुए।
न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव के विदाई समारोह में भारत के अपर सॉलिसिटर जनरल, उत्तर प्रदेश के अपर महाधिवक्ता, वरिष्ठ अधिवक्ता और बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं अन्य पदाधिकारी भी शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्य न्यायाधीश का कक्ष वकीलों से खचाखच भरा था।
न्यायमूर्ति यादव ने अपने विदाई समारोह में उन दिनों को याद किया जब उन्हें बिना किसी गलती के निशाना बनाया गया था, लेकिन उन्हें बार एसोसिएशन की तरफ से पूरा समर्थन मिला।
न्यायमूर्ति यादव ने कहा कि उनके खिलाफ महाभियोग लाया गया, उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया और जांच शुरू की गई। उन्होंने कहा कि उन्होंने जाति या धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने भगवान से प्रार्थना की कि आप लोगों को ऐसी स्थिति का सामना ना करना पड़े।’’
मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और अन्य वक्ताओं ने कहा कि न्यायमूर्ति यादव अपने पूरे करियर में अच्छे व्यक्ति थे और बार के प्रति उनका व्यवहार बहुत सहयोगात्मक रहा।
न्यायमूर्ति यादव ने विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के एक कार्यक्रम में कथित तौर पर विवादित टिप्पणियां की थीं जिसको लेकर उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया। मुसलमानों के खिलाफ उनकी टिप्पणियों को लेकर देशभर में विरोध हुआ था।
विहिप के विधि प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने धर्म, शासन और अल्पसंख्यक समुदाय के संदर्भ में कई विवादित टिप्पणियां की थीं। समान नागरिक संहिता विषय पर न्यायमूर्ति यादव ने कहा था कि भारत बहुसंख्यक आबादी की इच्छा के मुताबिक चलेगा।
मुसलमानों के खिलाफ अपमानजनक शब्द का कथित तौर पर इस्तेमाल करने के लिए उनकी भारी आलोचना हुई थी।
न्यायमूर्ति यादव को 12 दिसंबर, 2019 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय का अपर न्यायाधीश नियुक्त किया गया और 26 मार्च, 2021 को उन्हें स्थायी न्यायाधीश बनाया गया था।
भाषा सं राजेंद्र राजकुमार
राजकुमार