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बल्लेबाज के तौर पर रहाणे की जगह समीक्षा के दायरे में पर कप्तानी के अधिक विकल्प नहीं

नयी दिल्ली, 15 अप्रैल (भाषा) अजिंक्य रहाणे के लिए हालात काफी अच्छे नहीं चल रहे और उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है जिसे संभवत: कोई खिलाड़ी सुनना नहीं चाहता।

ऐसे कई मौके आए हैं जब टीमों की आईपीएल में शुरुआत बेहद खराब रही है लेकिन कोई भी टीम कोलकाता नाइट राइडर्स जितनी बिखरी हुई और कोई भी कप्तान इतना बेखबर पहले कभी नहीं दिखा। इसके अलावा बल्लेबाजी का अंदाज भी आईपीएल की शुरुआत के समय जितना ही पुराना है।

अभिषेक शर्मा और इशान किशन जैसे युवा खिलाड़ियों ने टी20 में बल्लेबाजी का अंदाज पूरी तरह से बदल दिया है और अब वैभव सूर्यवंशी ने तो इसे एक बिल्कुल ही नए स्तर पर पहुंचा दिया है। आयुष म्हात्रे और प्रियांश आर्य जैसे खिलाड़ियों को भी नहीं भूलना चाहिए।

सैंतीस साल की उम्र में रहाणे के लिए अब इस बदलते खेल के साथ कदम मिलाना या अपनी बल्लेबाजी के तरीके को बदलना नामुमकिन सा है क्योंकि उनकी बल्लेबाजी का तरीका पिछले 20 वर्षों में बनी उनकी ‘मसल मेमोरी’ (शारीरिक आदत) पर आधारित है।

अब इस बात पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि रहाणे इस टीम के कप्तान कैसे बने रह सकते हैं जबकि एक बल्लेबाज के तौर पर भी उनकी जगह पक्की नहीं है।

पांच मैच में रहाणे सिर्फ सात छक्के लगा पाए हैं लेकिन इससे भी अधिक हैरानी की बात यह है कि उन्होंने सिर्फ आठ चौके जड़े हैं। एक शीर्ष क्रम के बल्लेबाजी के लिए जो या तो पारी का आगाज करता है या फिर तीसरे नंबर पर आता है उसके लिए इस स्तर पर हर मैच में औसतन तीन बाउंड्री लगाना बहुत बड़ी नाकामी मानी जाएगी।

रहाणे का स्ट्राइक रेट भी 150 से कम है जो कोविड से पहले के दिनों में अच्छा माना जाता था लेकिन अब उस खिलाड़ी के लिए एक निराशाजनक तस्वीर पेश कर रहा है जो देश के लिए 80 से टेस्ट मैच खेल चुका है और सम्मानित पूर्व टेस्ट कप्तान है।

रहाणे बस अपनी साख को धूमिल कर रहे हैं लेकिन उनके हित में सबसे बड़ी चीज यह है कि नाइट राइडर्स के पास कोई विकल्प नहीं है। उप कप्तान रिंकू सिंह भी उतनी ही खराब फॉर्म में हैं।

टीम में कप्तानी का कुछ अनुभव रखने वाला एकमात्र अन्य खिलाड़ी रोवमैन पॉवेल है जिसने वेस्टइंडीज के लिए 37 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों और तीन एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच में कप्तानी की है।

टी20 अंतरराष्ट्रीय में उनका जीत का प्रतिशत 51 है लेकिन इस समय पॉवेल भी एक बेहतर विकल्प लगते हैं।

रहाणे और मुख्य कोच अभिषेक नायर के शिष्य अंगकृष रघुवंशी (155 के स्ट्राइक रेट से 182 रन बनाकर नाइट राइडर्स के मौजूदा शीर्ष स्कोरर) दोनों के शीर्ष चार में बल्लेबाजी करने के बावजूद नाइट राइडर्स को अधिकतर पावरप्ले में कभी भी वैसी जोरदार शुरुआत नहीं मिली जैसी मंगलवार को चेपक में मिली थी।

इसकी पूरी जिम्मेदारी सीईओ वेंकी मैसूर और नायर सहित नाइट राइडर्स के टीम प्रबंधन के सभी बड़े अधिकारियों पर आती है कि उन्होंने एक ऐसी टीम बनाई है जिसमें कोई उपयुक्त विकल्प मौजूद नहीं हैं।

भले ही रहाणे को बाहर बिठा दिया जाए लेकिन उनके पास ऐसे कोई बेहतरीन भारतीय रिजर्व खिलाड़ी नहीं हैं जो आकर पहले ही मैच से टीम को लय दे सके। एक युवा खिलाड़ी जिसमें स्वाभाविक रूप से जोरदार हिटिंग करने की क्षमता है वह दिल्ली के तेजस्वी दहिया हैं।

कुल मिलाकर नाइट राइडर्स के लिए हालात काफी गंभीर दिख रहे हैं और रहाणे के हाथ में कमान होने से ऐसा लगता है कि टीम का अभियान प्रतिकूल दिशा में जा रहा है।

भाषा सुधीर मोना

मोना