केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग द्वारा चोपता - तुंगनाथ चार किमी पैदल मार्ग के दोनों तरफ फैले सुरम्य मखमली बुग्यालों में मानवीय आवागमन प्रतिबन्धित करने के बाद भी बुग्यालों में मानवीय आवागमन होने से बुग्यालों की सुंदरता धीरे - धीरे गायब होने लगी है।
विभाग द्वारा चोपता - तुंगनाथ - चन्द्र शिला भूभाग का जिम्मा तीन वन कर्मियों को सौंपने से बुग्यालों में मानवीय आवागमन निरंतर जारी है, जबकि विभाग द्वारा पैदल मार्ग पर जगह - जगह साईन बोर्डों के माध्यम से सुरम्य मखमली बुग्यालों पर आवागमन न करने की सख्त चेतावनी भी दी गई है, फिर भी सुरम्य मखमली बुग्यालों में मानव आवागमन लगातार जारी है। आने वाले समय में अगर भुजगली - तुंगनाथ - चन्द्र शिला पैदल मार्ग के दोनों तरफ फैले सुरम्य मखमली बुग्यालों में मानवीय आवागमन पर रोक नहीं लगाई गई तो बुग्यालों की सुंदरता धीरे - धीरे गायब होने के साथ बरसात के समय बुग्यालों में उगने वाले अनेक प्रजाति के पुष्पों व बेस कीमती जडी़ - बूटियों पर भी संकट के बादल मंडरा सकते हैं।
बता दें कि चोपता - तुंगनाथ - चन्द्र शिला के आंचल में फैले भूभाग को प्रकृति ने अपने वैभवो का भरपूर दुलार दिया है। तुंगनाथ घाटी के पग - पग सुरम्य मखमली बुग्यालों की भरमार होने के कारण तुंगनाथ घाटी की विशिष्ट पहचान है और विश्व में तुंगनाथ घाटी या चोपता को मिनी स्वीजरलैण्ड के नाम से जाना जाता है।
तुंगनाथ घाटी के पग - पग फैले प्राकृतिक सौन्दर्य से रूबरू होने के लिए प्रतिवर्ष यहां लाखों तीर्थ यात्री, पर्यटक व सैलानी पहुंचते है तथा इन बुग्यालों की सुंदरता से रूबरू होकर तुंगनाथ घाटी घूमने का सुंदर सपना लेकर चले जाते हैं। तुंगनाथ घाटी में वर्ष भर पर्यटकों व सैलानियों की आवाजाही होने से स्थानीय तीर्थाटन, पर्यटन व्यवसाय में भी खासा इजाफा होने से स्थानीय युवाओं के सन्मुख स्वरोजगार के अवसर प्राप्त होते है।