उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा में मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के बाद विभिन्न श्रेणियों के श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी बढ़ा दी है। यह बढ़ी हुई दरें 1 अप्रैल से लागू हो गई हैं। गौतम बुद्ध नगर की जिला मजिस्ट्रेट मेधा रूपम ने बताया कि यह वृद्धि एक उच्च-शक्ति वाली समिति द्वारा की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि इस फैसले को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कल रात मंजूरी दे दी थी।
हाल ही में नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों का विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप ले बैठा, जिसमें हजारों श्रमिक सड़कों पर उतर आए। कम वेतन, लंबे कार्य घंटे और खराब कामकाजी परिस्थितियों से नाराज मजदूरों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस दबाव के बाद योगी आदित्यनाथ सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करना पड़ा और देर रात उच्चस्तरीय बैठक के बाद बड़े फैसले लिए गए।
सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से लागू नई अंतरिम मजदूरी दरों का ऐलान किया है। नोएडा (गौतमबुद्ध नगर) और गाजियाबाद में-
- अकुशल श्रमिक: ₹11,313 से बढ़ाकर ₹13,690
- अर्धकुशल श्रमिक: ₹12,445 से बढ़ाकर ₹15,059
- कुशल श्रमिक: ₹13,940 से बढ़ाकर ₹16,868
यानी अलग-अलग श्रेणियों में मजदूरी में अच्छी-खासी बढ़ोतरी की गई है। वहीं नगर निगम वाले अन्य शहरों और बाकी जिलों में भी मजदूरी बढ़ाई गई है, हालांकि दरें क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग तय की गई हैं। यह फैसला नियोक्ताओं के संगठनों और श्रम संगठनों के साथ बातचीत के बाद लिया गया है। सरकार ने कहा कि सुझावों और आपत्तियों की जांच की गई ताकि एक "संतुलित और व्यावहारिक" परिणाम सुनिश्चित हो सके।
- अकुशल श्रमिकों के लिए संशोधित मासिक मजदूरी 13,006 रुपये
- अर्ध-कुशल श्रमिकों के लिए 14,306 रुपये
- कुशल श्रमिकों के लिए 16,025 रुपये तय की गई है।
- अकुशल श्रमिकों को 12,356 रुपये प्रति माह
- अर्ध-कुशल श्रमिकों को 13,591 रुपये
- कुशल श्रमिकों को 15,224 रुपये
यह कदम सोमवार को नोएडा में फैक्ट्री श्रमिकों द्वारा बड़े पैमाने पर किए गए विरोध प्रदर्शनों के बाद लिया गया है। हजारों श्रमिकों ने उच्च मजदूरी और बेहतर काम करने की स्थिति की मांग की थी। जिले के कुछ हिस्सों में प्रदर्शन हिंसक हो गए थे, जिसके कारण सरकार को स्थिति को संभालने और श्रमिकों और नियोक्ताओं के साथ बातचीत करने के लिए एक समिति का गठन करना पड़ा।
प्रदर्शन कर रहे मजदूरों का कहना था कि वे लंबे समय से कम वेतन और असमानता का सामना कर रहे हैं। खासकर हरियाणा के मुकाबले कम वेतन मिलने से असंतोष बढ़ा। कई मजदूरों ने बताया कि ₹10-15 हजार में परिवार चलाना मुश्किल हो रहा था और वेतन बढ़ाकर ₹18-20 हजार करने की मांग की जा रही थी।
सरकार ने केवल वेतन बढ़ाने तक सीमित न रहकर कामकाजी स्थितियों में भी सुधार का भरोसा दिया है। इसमें—
- ओवरटाइम के लिए मज़दूरी दोगुनी होगी
- सभी कर्मचारियों को वीकली ऑफ़ मिलेगा
- वीकली ऑफ़ पर काम करने पर दोगुना भुगतान होगा
- बोनस 30 नवंबर से पहले मिल जाएगा
- यौन उत्पीड़न रोकथाम समिति बनाई जाएगी
- शिकायत पेटी लगाई जाएगी
- कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाएगा
- सैलरी महीने की 10 तारीख से पहले दी जाएगी
- कर्मचारियों को वेतन पर्ची दी जाएगी
नोएडा में यह आंदोलन इसलिए तेज हुआ क्योंकि हरियाणा में हाल ही में मजदूरी के वेतन में बड़ी बढ़ोतरी हुई थी, जिससे वहां और उत्तर प्रदेश के मजदूरों के बीच वेतन अंतर बढ़ गया। इसी असमानता ने विरोध को जन्म दिया। सरकार ने संकेत दिए हैं कि श्रम कानूनों को और मजबूत किया जाएगा, जिसमें समय पर वेतन, समान काम के लिए समान वेतन और सामाजिक सुरक्षा (EPF, ESI) जैसे प्रावधानों को बेहतर बनाया जाएगा। कुल मिलाकर, यह फैसला हजारों औद्योगिक मजदूरों के लिए राहत लेकर आया है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि स्थायी समाधान के लिए सरकार, उद्योग और श्रमिकों के बीच लगातार संवाद जरूरी रहेगा।