कांशीराम जयंती से ठीक पहले राहुल गांधी का आज लखनऊ दौरा है। राहुल गांधी का ये दौरा कांग्रेस की सामाजिक और राजनीतिक रणनीति का अहम संकेत माना जा रहा है। शुक्रवार को वह इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के जुपीटर हॉल में आयोजित सम्मेलन में शामिल होंगे, जहां दलित विद्वानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों संवाद करेंगे।
कांग्रेस इस आयोजन को 'सामाजिक परिवर्तन दिवस' के रूप में मना रही है। संवाद का फोकस संविधान की रक्षा, सामाजिक न्याय, तथा दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों, युवाओं और महिलाओं के अधिकारों पर रहेगा। इसे यूपी में कांग्रेस के कमजोर पड़े सामाजिक आधार, खासकर दलित और पिछड़े वर्गों को फिर से साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
15 मार्च को कांशीराम की जयंती से पहले यह कार्यक्रम प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह बहुजन राजनीति और दलित चेतना के बड़े प्रतीक हैं। 11 मार्च को रायबरेली दौरा टलने के बावजूद लखनऊ कार्यक्रम को प्राथमिकता देना बताता है कि कांग्रेस मिशन-2027 के तहत उत्तर प्रदेश पर विशेष ध्यान दे रही है।
कांग्रेस के सामने कई चुनौतियां हैं। दलित राजनीति में बसपा का प्रभाव अब भी बरकरार है, खासकर जाटव समुदाय में उसका भावनात्म जुड़ाव मजबूत है। दूसरी ओर, बीजेपी ने भी पिछले 10 बरसों में दलित वर्गों के बीच संगठन मजबूत किया है और सरकारी योजनाओं के जरिये समर्थन बढ़ाया है। इसलिए कांग्रेस के लिए इस वोट बैंक में बड़ी जगह बनाना आसान नहीं है। समाजवादी पार्टी भी सक्रिय है।
दूसरी ओर, कांग्रेस विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी हुई है। इसके लिए प्रदेश 375 न्याय योद्धाओं को जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। ये योद्धा विभन्न स्थानों पर होने वाली घटनाओं की जिम्मेदारी निभाएंगे। जो लोग मुकदमा लड़ने में सक्षम नहीं हैं, उनकी हर स्तर पर मदद करेंगे। न्याय योद्धा नियुक्त कने की जिम्मेदारी कांग्रेस विधि विभाग को सौंपी गई है।