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क्यूबा पर ट्रंप प्रशासन ने कसा शिकंजा, कई कंपनियों पर लगाए कड़े प्रतिबंध

ट्रंप प्रशासन क्यूबा पर दबाव बढ़ा रहा है। इसके तहत क्यूबा के उद्योगों पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। क्यूबा पहले से ही लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। अब अमेरिका इन प्रतिबंधों को और सख्ती से लागू कर रहा है। इसके अलावा, क्यूबा जाने वाले अमेरिकी नागरिकों पर भी नियम कड़े किए जा रहे हैं। उन्हें क्यूबा की सरकार के स्वामित्व वाले या उससे जुड़े कारोबारों के साथ लेन-देन करने से रोकने वाले कानूनों को सख्ती से लागू किया जा रहा है।

क्यूबा के दोषी जासूस फर्नांडो गोंजालेज ल्योर्ट पर प्रतिबंधों की घोषणा करते हुए अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि वह आईसीएपी के नेतृत्व पर प्रतिबंध लगा रहे हैं। रुबियो ने आरोप लगाया कि यह संगठन अमेरिका में एक ऐसे नेटवर्क को बढ़ावा देता है, जिसका उद्देश्य अमेरिकी नागरिकों को क्यूबा की सरकार के पक्ष में प्रभावित करना और कट्टर बनाना है।

अमेरिका के ट्रेजरी और स्टेट डिपार्टमेंट ने क्यूबा पर नए प्रतिबंधों का ऐलान किया है। इन प्रतिबंधों के तहत क्यूबा की सरकार के स्वामित्व वाली 10 कंपनियों को निशाना बनाया गया है। इनमें खनन, धातु और निर्माण क्षेत्र की कंपनियां शामिल हैं। इसके अलावा, अमेरिका ने ‘क्यूबन इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेंडशिप विद द पीपल्स’ के नेतृत्व पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। मार्को रुबियो ने क्यूबा के इस संस्थान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यह संस्थान अमेरिका में एक बड़े नेटवर्क को समर्थन देता है। रुबियो के मुताबिक, इस नेटवर्क का मकसद अमेरिकी लोगों की पहचान करना, उन्हें प्रभावित करना और कट्टरपंथी बनाना है।

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि इसी वजह से संस्थान के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। रुबियो ने कहा कि क्यूबा की सरकार ने हाल ही में पूर्व कम्युनिस्ट नेता और तानाशाह फिदेल कास्त्रो के 100वें जन्मदिन के मौके का इस्तेमाल एक कथित नेटवर्क को फिर से सक्रिय करने के लिए किया।उन्होंने कहा कि इसके लिए क्यूबा ने अलग-अलग देशों से अपने समर्थकों के एक नए समूह को हवाना बुलाया। रुबियो के मुताबिक, इन लोगों ने क्यूबा सरकार के अधिकारियों से मुलाकात की और संपर्क बनाए।

रुबियो ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ऐसी किसी भी विदेशी ताकत को चुपचाप काम नहीं करने देगा, जो अमेरिका की आजादी का गलत फायदा उठाने की कोशिश करे। उन्होंने क्यूबा सरकार पर आरोप लगाया कि वह झूठ, जासूसी और दूसरे तरीकों से अमेरिकी नागरिकों को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है।

ट्रंप प्रशासन ने क्यूबा पर दबाव बढ़ाने के लिए कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं और सैन्य कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। उन्होंने कहा कि क्यूबा का मकसद मार्क्सवाद, नस्लीय नफरत और कम्युनिस्ट हिंसा को बढ़ावा देना है। ट्रंप के रिपब्लिकन प्रशासन ने क्यूबा की सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है।
ईरान के साथ तनाव के बीच भी ट्रंप प्रशासन ने क्यूबा के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। अमेरिका ने हवाना को सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है।

इसके साथ ही क्यूबा सरकार की आर्थिक मदद को रोकने के लिए अमेरिका ने कई प्रतिबंध और कड़े कर दिए हैं। वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाने के लिए अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद अमेरिका ने क्यूबा पर तेल की नाकेबंदी लगा दी। वेनेज़ुएला पहले क्यूबा को मुफ्त तेल देता था। तेल की सप्लाई रुकने से क्यूबा की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। पहले से आर्थिक संकट से जूझ रहे क्यूबा में अब ईंधन की कमी और आर्थिक परेशानी गहरा गई है।