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राहुल गांधी के धरना प्रदर्शन के बाद पेलेट गन मामले में दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR

नई दिल्ली में पेलेट गन से घायल हुए साहिल लोचव की शिकायत के मामले में दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को FIR दर्ज कर ली। पुलिस ने यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 118 और 125 के तहत दर्ज किया है। FIR दर्ज कराने की मांग को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी शुक्रवार को संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। उनके साथ कांग्रेस की कई नेता और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। राहुल गांधी ने साहिल लोचव की शिकायत पर FIR दर्ज नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए पुलिस स्टेशन के बाहर धरना दिया था।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को कनॉट प्लेस में साहिल पर पेलेट गन से फायरिंग की गई थी। उन्होंने कहा कि AIIMS की रिपोर्ट के अनुसार साहिल के शरीर में 200 से अधिक पेलेट मौजूद हैं, जिनमें से तीन आंख में हैं। उनकी एक आंख की रोशनी चली गई है और दिल के पास भी कुछ पेलेट हैं, जिन्हें निकालना संभव नहीं है।

राहुल गांधी ने कहा, “दिल्ली पुलिस कहती है कि उन्होंने पेलेट गन नहीं चलाई। तो सवाल सिर्फ इतना है कि यह किया किसने? अपराध हुआ है और हम FIR दर्ज करने की मांग कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि जब तक FIR दर्ज नहीं होती, तब तक वह पुलिस स्टेशन से नहीं हटेंगे। राहुल गांधी ने गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस पर न्याय में बाधा डालने का भी आरोप लगाया।

पेलेट गन से घायल साहिल लोचव ने बताया कि 20 जुलाई को उन पर पेलेट गन से फायरिंग हुई थी। उन्हें पहले लेडी हार्डिंग अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से AIIMS रेफर किया गया। AIIMS में उनकी सर्जरी हुई, लेकिन अभी भी उनकी आंख की रोशनी स्पष्ट नहीं है। साहिल ने बताया कि उन्होंने 14 अगस्त को सात पन्नों की शिकायत अपने वकील के माध्यम से दी थी, लेकिन उस समय तक FIR दर्ज नहीं की गई थी। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी कहा कि पार्टी की मांग बेहद स्पष्ट है कि FIR दर्ज की जाए।

राहुल गांधी के प्रदर्शन पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी केवल मीडिया का ध्यान खींचने के लिए “कैमरा-केंद्रित ड्रामा” कर रहे हैं। नड्डा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही 20 जुलाई की घटना का संज्ञान ले चुका है और मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड कमेटी का गठन किया गया है। उन्होंने राहुल गांधी के प्रदर्शन को “सस्ती और ध्यान खींचने वाली राजनीति” करार दिया। नड्डा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ‘वंदे मातरम्’ के मुद्दे पर हो रही आलोचना से ध्यान भटकाने के लिए इस पूरे मामले को राजनीतिक रूप दे रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पुलिस की ज्यादती और प्रदर्शनकारियों की हिंसा के आरोपों की जांच के लिए पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड एक्सपर्ट कमेटी (HPEC) का गठन किया है। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी करेंगे। समिति में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश शलिंदर कौर, पूर्व CBI निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व DGP एल.आर. बिश्नोई शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने समिति को प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग, प्रदर्शनकारियों की हिंसा और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित उत्पीड़न व दुर्व्यवहार जैसे आरोपों की जांच को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि प्रदर्शन के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों को अंतरिम मुआवजा देने की संभावना पर भी समिति विचार कर सकती है। साथ ही प्रदर्शन से जुड़े CCTV और पुलिस व सुरक्षाकर्मियों के बॉडी-कैमरा फुटेज समिति को सौंपने का निर्देश दिया गया है। इस बीच दिल्ली पुलिस द्वारा साहिल लोचव की शिकायत पर FIR दर्ज किए जाने के बाद मामले की जांच अब आगे बढ़ेगी।