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हरदोई से जुड़ी हैं होलिका दहन की जड़ें, आज भी मौजूद हैं प्रह्लाद कुंड समेत कई निशानियां

Uttar Pradesh: होली के त्योहार का उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से खास जुड़ाव है। इसका प्राचीन नाम हरिद्रोही था और ये असुरराज हिरण्यकश्यप की राजधानी थी। माना जाता है कि होलिका दहन की परंपरा यहीं से शुरू हुई।

मान्यता है कि हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका के साथ मिलकर विष्णु भक्त अपने बेटे प्रह्लाद को जलाने की कोशिश की थी। लेकिन होलिका भस्म हो गई और प्रह्लाद बच गए। कहा जाता है कि इसी राख से भक्त प्रह्लाद ने सबसे पहले होली थी और तभी से होलिका दहन की परंपरा शुरू हुई।

हरदोई के लोगों ने इस पौराणिक कथा को अपनी स्थानीय परंपरा का अटूट हिस्सा मान लिया है। उनका दावा है कि पौराणिक ग्रंथों में बताई गई घटना इसी इलाके में हुई थी। इसका जिक्र हरदोई गजेटियर में भी है। लोगों का कहना है कि जिले में मौजूद करीब 5000 साल से भी पुराना नरसिंह भगवान मंदिर, प्रहलाद कुंड और हिरण्यकश्यप के महल का खंडहर होली से जुड़े उनके दावों को पुख्ता करता है।

जहां पूरा देश रंग खेलने से एक दिन पहले होलिका दहन करता है, तो वहीं हरदोई में लोग इस मौके को इस विश्वास के साथ मनाते हैं कि उनके इलाके ने इस पौराणिक कथा में अहम भूमिका निभाई थी।