Breaking News

ईरान तनाव: गैर-जरूरी US डिप्लोमैट्स और परिवारों को लेबनान छोड़ने का आदेश जारी     |   'एपस्टीन फाइल्स में पीएम मोदी का नाम आना शर्म की बात', राहुल गांधी का X पोस्ट     |   झारखंड: गिरिडीह में वोटिंग के दौरान दो गुटों में झड़प, गोली लगने से दो लोग घायल     |   ओडिशा के कंधमाल जिले में सुरक्षाकर्मियों के साथ मुठभेड़ में दो माओवादी मारे गए     |   ₹1000 तक वाले निष्क्रिय खातों की रकम बिना कागजी कार्रवाई लौटेगी: EPFO     |  

दिल्ली वायु प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कोयला आधारित उद्योगों को हटाने पर केंद्र से मांगा जवाब

Delhi Pollution: सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को दिल्ली-एनसीआर से सभी कोयला आधारित उद्योगों को स्थानांतरित करने के प्रस्ताव पर केंद्रीय मंत्रालयों से जवाब मांगा, ताकि वायु गुणवत्ता में सुधार सुनिश्चित किया जा सके। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में लगातार बने वायु गुणवत्ता संकट से निपटने के लिए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा कि वो वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) द्वारा दिए गए सुझावों के आधार पर 12 मार्च को वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण के मुद्दे की जांच करेगी।

पीठ ने निर्माण और विध्वंस गतिविधियों से पैदा होने वाली धूल से निपटने के लिए सीएक्यूएम द्वारा सुझाए गए उपायों पर सभी हितधारकों से जवाब भी मांगा। सर्वोच्च न्यायालय ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी), पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (एमओपीएनजी) और विद्युत मंत्रालय से इस सुझाव पर जवाब मांगा कि दिल्ली से 300 किलोमीटर के दायरे में कोई भी नया कोयला आधारित तापीय विद्युत संयंत्र स्थापित न किया जाए।

अदालत ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान को एनसीआर में कोयला आधारित उद्योगों सहित हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित करने के लिए सार्वजनिक नोटिस जारी करने का आदेश दिया। इन नोटिसों को न्यायालय द्वारा तामील माना जाएगा और राज्यों को मिली प्रतिक्रिया का विवरण देते हुए एक "कार्रवाई योजना" प्रस्तुत करनी होगी।

न्यायालय ने एमओईएफसीसी, एमओपीएनजी और विद्युत मंत्रालय को एनसीआर में कोयला आधारित उद्योगों को चरणबद्ध तरीके से बंद करने के मकसद से एक संयुक्त प्रस्ताव पेश करने को कहा। न्यायालय ने आदेश दिया, "प्रस्ताव में सबसे पहले उद्योगों की पहचान की जाए और ये तय किया जाए कि उनके लिए वैकल्पिक ईंधन स्रोत क्या उपलब्ध कराए जा सकते हैं।"

न्यायालय ने दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार (जीएनसीटीडी) को सीएक्यूएम द्वारा अनुशंसित इन दीर्घकालिक समाधानों को लागू करने के लिए एक विशिष्ट कार्य योजना पेश करने का आदेश दिया। न्यायालय ने कहा, "आयोग ने कार्रवाई करने के लिए अपेक्षित संबंधित एजेंसियों की पहचान कर ली है। इसलिए हम दिल्ली सरकार को इन उपायों को प्रभावी बनाने के लिए एक प्रस्तावित कार्य योजना पेश करने का आदेश देते हैं।" अब पीठ ने सभी हितधारकों को 12 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई से पहले अपनी-अपनी स्थिति रिपोर्ट और प्रस्ताव दाखिल करने का आदेश दिया है।