झारखंड के 28 वर्षीय सजुल टुडू ने अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प का ऐसा उदाहरण पेश किया है, जो हर किसी के लिए प्रेरणा बन गया है। वर्ष 2014 में पावर ट्रांसमिशन लाइन से जुड़े एक हादसे में उन्होंने अपना एक हाथ और एक पैर खो दिया था। लेकिन इस गंभीर दुर्घटना के बावजूद उन्होंने जीवन की राह में हार नहीं मानी।
करीब 11 महीने पहले हजारीबाग से शुरू हुए अपने साहसिक साइकिल अभियान में सजुल अब तक देश के 16 राज्यों की यात्रा कर चुके हैं और फिलहाल हरियाणा की ओर बढ़ रहे हैं। यह सफर केवल रोमांच या व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक मजबूत संदेश छिपा है।
सजुल का उद्देश्य लोगों को यह प्रेरणा देना है कि जीवन में आने वाली कठिनाइयां कभी भी सपनों और लक्ष्यों को हासिल करने से नहीं रोक सकतीं। उनका मानना है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास के बल पर किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है। यात्रा के दौरान देशभर के लोगों से मिल रहा प्यार, सम्मान और समर्थन उनके हौसले को और मजबूत कर रहा है। सजुल टुडू का साहस और अडिग इरादा आज हजारों युवाओं और दिव्यांगजनों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है।