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कोर्ट के फैसले के बाद पहले मंगलवार को भोजशाला में उमड़े श्रद्धालु, किया हनुमान चालीसा का पाठ

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा धार जिले में स्थित भोजशाला को देवी सरस्वती का मंदिर करार दिए जाने और फिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की ओर से हिंदू समुदाय को पूजा-अर्चना और अन्य गतिविधियों के लिए स्मारक में निर्बाध प्रवेश की अनुमति दिए जाने के बाद पहले मंगलवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने यहां पूजा अर्चना की।

इस दौरान श्रद्धालुओं ने सरस्वती वंदना की, हनुमान चालीसा का पाठ किया, मिठाइयां बांटी, पटाखे छोड़े, शंख बजाए और हवन कीर्तन भी किया।
भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा ने बातचीत में कहा कि अदालत के फैसले के बाद आए पहले मंगलवार को मंदिर परिसर में महासत्याग्रह का आयोजन किया गया, जिसके माध्यम से इस सत्याग्रह के लिए शहीद हुए सभी लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

उन्होंने कहा, "ये महासत्याग्रह तब तक जारी रहेगा जब तक लंदन से मां वाग्देवी की प्रतिमा यहां ला कर भोजशाला में विराजमान नहीं कर दी जाती।"
वकील मनीष गुप्ता ने बताया की पिछले 70 वर्षों से धार की धर्मपरायण जनता हर मंगलवार को भोजशाला में सत्याग्रह कर रही है, जिसका परिणाम है कि न्यायालय ने इस परिसर को मंदिर घोषित किया है। उन्होंने बताया कि सत्याग्रह अभी समाप्त नहीं हुआ है क्योंकि कुछ मांगे अभी भी लंबित हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को निर्देशों के अनुसार लंदन में स्थित मां वाग्देवी की प्रतिमा वापस लाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए और इस पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने मांग की कि परिसर और गर्भगृह में मौजूद इस्लामिक आयतों को हटाया जाए, क्योंकि यह श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत करती हैं। गुप्ता ने ये मांग भी की कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के सर्वे के दौरान पूरी खुदाई नहीं हो सकी, इसलिए परिसर में दबी हुई मूर्तियों को बाहर निकालने के लिए दोबारा खुदाई कराई जाए ताकि भक्तों की आस्था का सम्मान हो सके। 

स्थानीय पंडित वर्धन तिवारी ने कहा कि अदालत के फैसले के बाद आज पहला मंगलवार है, इसलिए बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने महाआरती की, सरस्वती वंदना हुई, हनुमान जी की आरती और हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। उन्होंने कहा कि लोगों ने हवन भी किया गया, दीपोत्सव मनाया और पटाखे भी छोड़े। उन्होंने कहा कि धार में हर गली मोहल्ले में खुशी का माहौल है और लोग मिठाइयां बांट रहे हैं।

 मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को भोजशाला को देवी सरस्वती का मंदिर करार दिया था, जिसके अगले ही दिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने शनिवार को हिंदू समुदाय को पूजा-अर्चना और अन्य गतिविधियों के लिए स्मारक में निर्बाध प्रवेश की अनुमति दे दी। उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने शुक्रवार को अपने फैसले में एएसआई के सात अप्रैल 2003 के उस आदेश को भी निरस्त कर दिया था, जिसके तहत हिंदुओं को केवल मंगलवार को पूजा की अनुमति दी गई थी और मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को नमाज अदा करने की इजाजत दी गई थी।

ग्यारहवीं शताब्दी के इस स्मारक की धार्मिक प्रकृति को लेकर विवाद उस समय उत्पन्न हुआ था जब मुस्लिम पक्ष ने इसे कमाल मौला मस्जिद बताया, जबकि हिंदू पक्षकारों का कहना था कि यहां परमार वंश के राजा भोज द्वारा निर्मित मंदिर था जिसे अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के दौरान ध्वस्त कर दिया गया। मुस्लिम पक्ष ने उच्च न्यायालय के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देने की घोषणा की है।