उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर और धर्मपाल सिंह के साथ बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने सोमवार को सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधा। बीजेपी नेताओं ने सपा की राजनीति, परिवारवाद, महिला सुरक्षा और चुनाव आयोग को लेकर अखिलेश यादव के रुख पर सवाल उठाए।
‘लोहिया के समाजवाद से अखिलेश का कोई लेना-देना नहीं’
कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी अब डॉ. राममनोहर लोहिया के सिद्धांतों से दूर हो चुकी है। उन्होंने कहा कि लोहिया परिवारवाद की राजनीति के विरोधी थे और सनातन परंपरा के सम्मान की बात करते थे। राजभर के मुताबिक, अखिलेश यादव की राजनीति का लोहिया के समाजवाद से कोई संबंध नहीं रह गया है।
राजभर ने चुनाव आयोग को लेकर अखिलेश यादव के सवालों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा को आगामी विधानसभा चुनाव में हार का अंदेशा है, इसलिए पार्टी पहले से ही हार के बहाने तैयार करने में जुटी है।
‘फर्जी मतदाताओं के नाम हटने से परेशान है विपक्ष’
कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास विकास और जनकल्याण का कोई ठोस एजेंडा नहीं है। धर्मपाल सिंह ने आरोप लगाया कि फर्जी मतदाताओं के नाम हटाए जाने से विपक्ष परेशान है और इसी वजह से चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है।
महिला सुरक्षा को लेकर सपा पर निशाना
धर्मपाल सिंह ने सपा सरकार के कार्यकाल में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा की स्थिति चिंताजनक थी। बीजेपी सरकार का पक्ष रखते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार में महिलाओं, बेटियों, व्यापारियों और आम लोगों की सुरक्षा प्राथमिकता है।
‘चुनाव जीतने पर आयोग ठीक, हारने पर सवाल’
बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने चुनाव आयोग के प्रमुख को हटाने की मांग और विपक्ष के प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया देते हुए विपक्षी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि एनडीए को हराने में नाकाम रहने के बाद विपक्ष अपनी कमियों पर विचार करने के बजाय चुनाव व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है।
दिनेश प्रताप सिंह ने अखिलेश यादव और राहुल गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष जिन राज्यों में चुनाव जीतता है, वहां चुनाव आयोग, ईवीएम और मतगणना की व्यवस्था पर सवाल नहीं उठाए जाते। लेकिन हार मिलने पर पूरी व्यवस्था पर आरोप लगाए जाते हैं। उन्होंने इसे विपक्ष का दोहरा रवैया बताया।
‘चुनाव आते ही जाति-धर्म की राजनीति करने लगते हैं अखिलेश’
दिनेश प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव चुनाव नजदीक आने पर जाति और धर्म के आधार पर राजनीति करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि सपा प्रमुख को अपनी कमियों पर विचार करना चाहिए, न कि भाजपा और सरकार पर आरोप लगाना चाहिए।
बीजेपी प्रवक्ता ने अखिलेश यादव पर लोहिया के विचारों से दूर होने का आरोप लगाते हुए मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि सपा प्रमुख की राजनीति लोहिया के सिद्धांतों के बजाय इन नेताओं की विचारधारा से प्रभावित है।
बीजेपी नेताओं के इन बयानों से उत्तर प्रदेश में सपा और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले परिवारवाद, महिला सुरक्षा, मतदाता सूची और चुनाव आयोग जैसे मुद्दों पर दोनों दलों के बीच सियासी टकराव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।