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तमिलनाडु: बैल को काबू करने वाले कार्यक्रम पलामेदु 'जल्लीकट्टू' का दूसरा दिन

तमिलनाडु में तीन दिन चलने वाला मशहूर जल्लीकट्टू कार्यक्रम मंगलवार को शुरू हुआ। बुधवार को दूसरे दिन मदुरै जिले में आयोजित पलामेदु जल्लीकट्टू में लगभग 1,100 बैल और 900 बैलों को काबू करने वाले प्रतिभागी शामिल हुए। इस प्रतियोगिता में उन बैल को ही मैदान में छोड़ा जाता है जो जरूरी चिकित्सा परीक्षण पास कर लेते हैं और जिन्हेंं योग्यता प्रमाण पत्र जारी किया जाता है।

पहले से पंजीकृत बैलों की जांच की जाती है। बैल कम से कम चार फीट लंबे होने चाहिए। उनके चार दांत होने चाहिए, साथ ही सींग पैने नहीं होने चाहिए और उनके शरीर पर कोई घाव नहीं होना चाहिए। सात लोगों की मेडिकल टीम बैलों की आंखों और दांतों की जांच करती है। साथ ही वो ये भी जांच करती हैं कि बैल को शराब या किसी तरह का कोई नशीला पदार्थ न दिया गया हो।

जैसे ही बैल अपने प्रवेश द्वार 'वादीवासल' से बाहर निकले, उत्साही युवकों ने एक के बाद एक बैल की कूबड़ को पकड़कर उन पर काबू पाने की कोशिश की। इस दौरान खेल देखने आए लोग काफी खुश दिखे। अवनियापुरम में बैलों को काबू करने का मशहूर खेल 'जल्लीकट्टू' पोंगल के दिन मंगलवार को शुरू हुआ।

इस बार सबसे बेहतर चुने गए बैल के मालिक को एक ट्रैक्टर दिया गया, जबकि बैल को सबसे अच्छे ढंग से नियंत्रित करने वाले को इनाम में गाड़ी दी गई। मदुरै के अवनियापुरम, पलामेदु और अलंगनल्लूर में होने वाला 'जल्लीकट्टू' सबसे मशहूर है।