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दिल्ली सरकार ने कोर्ट से कहा, निजी स्कूल एक अप्रैल से नहीं ले सकेंगे मनमानी फीस

New Delhi: दिल्ली सरकार ने उच्च न्यायालय को बताया कि निजी स्कूल नए शैक्षणिक सत्र के लिए एक अप्रैल से तब तक शुल्क नहीं वसूल सकते, जब तक कि नए शुल्क-नियमन कानून के अनुसार शुल्क निर्धारित और अनुमोदित न हो जाए।

आगामी शैक्षणिक वर्ष के लिए स्कूल-स्तरीय शुल्क नियमन समितियों (एसएलएफआरसी) के गठन के सरकारी आदेश पर रोक लगाने की मांग करने वाले कई स्कूल संघों द्वारा दायर याचिकाओं का विरोध करते हुए, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने कहा कि इसके परिणाम ‘भीषण’ होंगे और इस स्तर पर ऐसी समिति के गठन से स्कूलों को कोई नुकसान नहीं होगा।

मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ स्कूलों के कई संघों द्वारा दायर उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें 10 दिनों के भीतर समितियों के गठन के संबंध में सरकार की एक फरवरी की अधिसूचना को चुनौती दी गई थी। राजू ने कहा, ‘‘मेरा तर्क यह है कि दिल्ली स्कूल शिक्षा (शुल्क निर्धारण और नियमन में पारदर्शिता) अधिनियम के तहत अनुमोदित शुल्क के अलावा कोई भी शुल्क नहीं ले सकते। वे एक अप्रैल से शुल्क नहीं वसूल सकते क्योंकि अधिनियम इसकी अनुमति नहीं देता है।’’

उन्होंने कहा कि शैक्षणिक वर्ष शुरू होने से पहले (अधिनियम में) शुल्क प्रस्ताव प्रस्तुत करने की अनुमति है। इससे किसी को कोई पूर्वाग्रह नहीं होगा। राजू ने एक फरवरी की अधिसूचना (कठिनाई निवारण आदेश) का बचाव करते हुए कहा कि स्कूल शुल्क निर्धारण की प्रक्रिया निर्धारित समय से ‘पहले’ शुरू की गई ताकि नए कानून के अनुसार नए शैक्षणिक सत्र से पहले शुल्क निर्धारित हो जाए।

उन्होंने कहा कि ये आदेश स्कूलों, छात्रों और अभिभावकों के हित में है, अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख 24 फरवरी तय की है। अदालत ने दिल्ली सरकार द्वारा निजी स्कूलों के लिए एसएलएफआरसी गठित करने के लिए निर्धारित 10 फरवरी की समय सीमा को भी तब तक के लिए बढ़ा दिया।

अदालत ने गैर-सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों की कार्य समिति की ओर से पेश वरिष्ठ वकील से पूछा कि वे एसएलएफआरसी क्यों नहीं गठित करना चाहते। वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने कहा कि एक फरवरी की अधिसूचना कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है क्योंकि ये अधिनियम में निर्धारित समय सीमा को बदल देती है।