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सावन माह और कांवड़ यात्रा की शुरुआत, हरिद्वार से पश्चिमी यूपी तक हाई अलर्ट

भगवान शिव की आराधना के पवित्र सावन माह की आज से शुरुआत हो गई है। इसके साथ ही देशभर में कांवड़ यात्रा का भी आगाज हो गया है। सावन के पहले दिन शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। हरिद्वार से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और देश के अन्य प्रमुख शिवधामों में श्रद्धालु भगवान शिव की भक्ति में लीन नजर आ रहे हैं।

कांवड़ यात्रा को लेकर प्रशासन ने भी सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। हरिद्वार से पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड पर है। कांवड़ियों की भारी संख्या को देखते हुए कई राज्यों में रूट डायवर्जन प्लान जारी किया गया है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया गया है।

कांवड़ यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचकर गंगाजल लेकर अपने-अपने क्षेत्रों के लिए रवाना होते हैं। इसके मद्देनजर प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है और कांवड़ियों के लिए अलग रूट निर्धारित किए गए हैं। प्रशासन की ओर से लोगों से डायवर्जन प्लान का पालन करने और यात्रा के दौरान सावधानी बरतने की अपील की गई है।

वहीं, सावन के पहले दिन मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में विशेष भस्म आरती संपन्न हुई। भस्म आरती के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। पूरे मंदिर परिसर में हर-हर महादेव और जय महाकाल के जयकारे गूंजते रहे। सावन के आगाज के साथ ही महाकाल की नगरी उज्जैन में भी आस्था का सैलाब देखने को मिला।

सावन माह के दौरान देशभर के शिव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। इस वर्ष 11 अगस्त को शिवरात्रि मनाई जाएगी। इसी के साथ कांवड़ यात्रा का भी समापन होगा। शिवरात्रि के अवसर पर शिवालयों में कांवड़ियों द्वारा लाए गए गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाएगा। कांवड़ यात्रा को देखते हुए हरिद्वार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली और आसपास के राज्यों में प्रशासन ने विशेष सतर्कता बरती है। सुरक्षा के साथ-साथ यातायात प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं और आम लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।