जैसे-जैसे महाराष्ट्र विधानसभा के मतदान की तारीख नजदीक आ रही है सभी की निगाहें मराठवाड़ा इलाके पर लगी हैं। मराठवाडा मनोज जारांगे पाटिल की अगुवाई मेें चले मराठा आरक्षण आंदोलन का केंद्र था। इस आंदोलन का इलाके में अहम असर पड़ा है। जालना जिले में जरांगे के गांव अंतरवाली सारथी में कई प्रदर्शन हुए हैं।
मराठा आरक्षण आंदोलन का असर हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों में भी दिखाई दिया। महायुति गठबंधन इलाके की आठ में से महज एक सीट जीतने में ही कामयाब रहा। आगामी चुनावों में मराठवाड़ा इलाके की 46 विधानसभा सीटों पर मराठा समुदाय का बड़ा असर होने की उम्मीद है। मराठा समुदाय का मानना है कि सरकार ने आरक्षण के मुद्दे पर उन्हें गुमराह किया है।
सभी राजनैतिक दल इस बात से सहमत हैं कि जरांगे पाटिल फैक्टर आगामी विधानसभा चुनावों में मराठवाड़ा में अहम भूमिका निभा सकता है। विपक्षी दल भी मानते हैं कि मराठा आरक्षण आंदोलन का खूब असर है। उनका कहना है कि आरक्षण मुद्दे के समाधान के लिए सरकार ने कभी पूरे मन से कोेशिश नहीं की।
जरांगे के निशाने पर उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस रहे हैं। वो उन्हें महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार का असली बॉस बताते हैं।इसका बीजेपी को खामियाजा भी भुगतना पड़ा है। हाल के लोकसभा चुनावों में उसके कुछ बड़े नेताओं को हार का सामना करना पड़ा था।
मराठा समुदाय के कई लोग आगामी चुनावों से पहले मार्गदर्शन के लिए मनोज जरांगे पाटिल की ओर देख रहे हैं। अब ये देखना बाकी है कि उनका रसूख विधानसभा के नतीजों पर कितना असर डालता है। 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा के लिए मतदान 20 नवंबर को होगा और नतीजों का ऐलान 23 नवंबर को किया जाएगा।