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महाराष्ट्र: 'पेण' की गणेश मूर्तियां होती हैं खास, दुनिया भर में मशहूर मूर्तियों को मिल चुका है Gi Tag

मुंबई से कुछ घंटों की दूरी पर महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में एक छोटा सा शहर है। नाम है 'पेण'। इसकी अलग और खास पहचान है। ये शहर भारत में गणेश प्रतिमाएं बनाने के प्रमुख केंद्रों में एक है। हर साल गणेश चतुर्थी के नजदीक आते ही पेन में तैयारियां शुरू हो जाती हैं। कारीगर बड़ी बारीकी से जीवंत मूर्तियां बनाते हैं।

पेण में बनने वाली गणेश मूर्तियों की एक खासियत होती है आंखों की बारीक नक्काशी। हर मूर्ति भावपूर्ण होती है। हर मूर्ति का अलग और अनोखा आकर्षण होता है। हरेक मूर्ति बनाने के लिए पूरा परिवार मेहनत करता है। कारीगर मिट्टी को आकार देते हैं, रंगों का मेल तैयार करते हैं और फिर चित्रकार उसे अंतिम रूप देते हैं। इस शिल्प का हुनर धीरज और कौशल पर आधारित होता है।

पेण में गणेश मूर्तियां बनाने की परंपरा एक सदी से भी ज्यादा पुरानी है। कई परिवारों ने पीढ़ियों से इस विरासत को संजोया है। हालांकि बड़े पैमाने पर मूर्तियां बनाने का काम आजादी के बाद, 1950 के दशक में शुरू हुआ।

पारंपरिक मूर्तियों के अलावा अब थीम आधारित मूर्तियां भी बनने लगी हैं। ये पॉप संस्कृति, फिल्मों और मशहूर हस्तियों पर आधारित होती हैं। हालांकि इनका बाजार अभी छोटा है। पेन में मूर्तियां बनाना लंबी-चौड़ी प्रक्रिया है। इसमें ढलाई और पेंटिंग से लेकर बारीक चित्रकारी तक शामिल है। हर चरण के लिए परिवार के सदस्य अलग-अलग काम करते हैं।

पेण में मूर्तियों पर की गई कारीगरी दुनिया भर में मशहूर है। इसे जीआई टैग भी मिल चुका है, जो इसकी प्रामाणिकता का सबूत है। पेन में घरों के लिए छोटी मूर्तियों से लेकर देश-विदेश के लिए भव्य और विशाल प्रतिमाएं बनती हैं। हाथ से बनी हरेक मूर्ति गणेश चतुर्थी की आस्था को और गहरा बनाती है।