दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की उस मांग को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने आबकारी नीति मामले से जुड़ी अपनी याचिका को जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की बेंच से किसी अन्य जज के पास स्थानांतरित करने की अपील की थी।मुख्य न्यायाधीश ने प्रशासनिक स्तर पर दिए गए एक संदेश में कहा कि यह मामला मौजूदा रोस्टर के अनुसार संबंधित जज को सौंपा गया है, इसलिए इसे दूसरी बेंच को ट्रांसफर करने का कोई आधार नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “याचिका वर्तमान रोस्टर के अनुसार माननीय न्यायाधीश को सौंपी गई है। यदि जज के स्वयं को मामले से अलग (रिक्यूज़) करने का सवाल उठता है तो उसका फैसला वही जज करेंगे। मुझे प्रशासनिक स्तर पर इस याचिका को स्थानांतरित करने का कोई कारण नहीं दिखता।”इस फैसले की जानकारी आम आदमी पार्टी (AAP) की कानूनी टीम ने दी, जिसने बताया कि उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट प्रशासन से मुख्य न्यायाधीश का यह संदेश मिला है।
दरअसल, अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली एक्साइज पॉलिसी मामले से जुड़ी अपनी याचिका को जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की बेंच से हटाकर किसी दूसरी बेंच को देने की मांग की थी और इसके लिए मुख्य न्यायाधीश को प्रशासनिक स्तर पर आवेदन दिया था। हालांकि मुख्य न्यायाधीश ने हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि मामला हाईकोर्ट के रोस्टर सिस्टम के अनुसार ही जस्टिस शर्मा के सामने सूचीबद्ध किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जज के मामले से अलग होने का कोई सवाल उठता है तो उसका निर्णय सिर्फ वही जज लेंगी जो इस मामले की सुनवाई कर रही हैं।
यह मामला दिल्ली की अब रद्द हो चुकी आबकारी नीति से जुड़ा है। आरोप है कि इस नीति को कुछ निजी लाइसेंसधारियों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाया गया था, जिससे कथित तौर पर किकबैक (घूस) और दिल्ली सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ। हालांकि ट्रायल कोर्ट पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित कुछ आरोपियों को मामले में राहत दे चुकी है।