दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) ने हर महीने के पहले और तीसरे शनिवार को काम से विरत रहने (हड़ताल) का फैसला किया है। यह निर्णय अदालत द्वारा इन दिनों को कार्य दिवस घोषित किए जाने के विरोध में लिया गया है। 2 अप्रैल को जारी नोटिस के मुताबिक, 27 मार्च को हुई एग्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक में इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया गया। बार एसोसिएशन ने बताया कि इस फैसले पर पुनर्विचार के लिए पहले भी हाई कोर्ट से कई बार अनुरोध किया गया था, लेकिन अब तक कोई बदलाव नहीं किया गया, जिसके बाद यह कदम उठाया गया।
वकीलों का कहना है कि शनिवार को कोर्ट खुलने से उनके अन्य पेशेवर काम प्रभावित होंगे, जैसे ट्रिब्यूनल, आर्बिट्रेशन, मेडिएशन और दिल्ली के बाहर की अदालतों में पेशियां। इसके अलावा, केस की तैयारी, क्लाइंट मीटिंग्स और काम की गुणवत्ता पर भी असर पड़ने की चिंता जताई गई है। DHCBA ने अपने सभी सदस्यों से 4 अप्रैल से इस निर्णय का पालन करने की अपील की है। साथ ही, अदालतों में कामकाज पूरी तरह बाधित न हो, इसके लिए हर कोर्ट में प्रॉक्सी काउंसल की व्यवस्था भी की जाएगी।
एसोसिएशन ने एक बार फिर दिल्ली हाई कोर्ट से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है और उम्मीद जताई है कि वकीलों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए उचित समाधान निकाला जाएगा। यह नोटिस DHCBA के अध्यक्ष एन. हरिहरन और मानद सचिव विक्रम सिंह पंवार के हस्ताक्षर से जारी किया गया है।