Ranchi: 'बिरसा हरित ग्राम योजना' झारखंड के किसानों की जिंदगी में फलों की मिठास घोल रही है। हेमंत सोरेन सरकार ने मई 2020 में प्रदेश के किसानों को इस योजना की सौग़ात दी, जिसके तहत किसानों को बाग़वानी के लिए प्रेरित किया और उन्हें उनके घर में ही रोज़गार मिला।
बिरसा हरित ग्राम योजना का लाभ अनुसूचित जाति, आदिवासी या बीपीएल परिवारों को मिलता है। इसके अलावा मनरेगा जॉब कार्ड भी होना चाहिए। इस योजना का उद्देश्य बंजर भूमि को फलदार पेड़ों के बागान में बदलकर स्थायी आजीविका के अवसर प्रदान करना है। जिसके लिए झारखंड सरकार किसानों को मुफ्त में पौधे प्रदान करती है। झारखंड सरकार की मदद से प्रदेश के किसानों को डबल लाभ हो रहा है। फल की बाग़वानी के साथ- साथ किसान दूसरी मौसमी सब्जियों और अनाज की खेती भी करते हैं। रांची के सेवाडीह गांव के रहने वाले राजू खलखो ने करीब 30 एकड़ ज़मीन में आम और इमारती लकड़ी की बागवानी की, जिसका उन्हें काफी लाभ हुआ। सेवाडीह गांव के ही रहने वाले धनेश्वर गोप ने भी दो साल पहले 2 एकड़ ज़मीन में योजना का लाभ उठाकर आम की बागवानी शुरू की और उन्हें उम्मीद है कि आने वाले समय में उनकी आजीविका और बेहतर होगी।
लॉकडाउन के बीच शुरू हुई ये योजना अब झारखंड के किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। 2020 से 2024 के बीच 1 लाख 10 हजार 664 एकड़ में 1 करोड़ 18 लाख 54 हजार 331 फलदार पौधे लगाए गए। बिरसा हरित किसान योजना से प्रदेश में बागवानी बढ़ने के साथ किसानों की आजीविका में उछाल आया, जिससे पलायन रुकने के साथ - साथ प्रदेश में हरियाली भी बढ़ रही है। यानी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में बिरसा हरित ग्राम योजना, किसानों की किस्मत बदल रही है,फलों का राजा उनके जीवन में सशक्त बना रहा है और प्रदेश के किसान खुशहाल हो रहे हैं।