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पेपर लीक रोकने वाला बिल ‘मील का पत्थर’, छात्रों के हित के लिए सरकार प्रतिबद्ध: जितेंद्र सिंह

केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को कहा कि सरकार छात्रों और युवाओं के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को संसद के इतिहास में एक 'मील का पत्थर' बताया। जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन से जुड़े इस बिल को चर्चा के लिए पेश किया। यह बिल NEET-UG पेपर लीक को लेकर हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के बीच लाया गया है।

उन्होंने कहा कि यह बिल छात्रों और देश के युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखने की सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प है कि किसी को भी देश के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस संशोधन का उद्देश्य कानून को और सख्त बनाना और मामलों में जल्द न्याय सुनिश्चित करना है, ताकि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को मजबूत किया जा सके।

बिल में अनुचित तरीकों का इस्तेमाल करने वालों के लिए जेल की सजा बढ़ाने का प्रस्ताव है। मौजूदा कानून में कम से कम 3 साल और अधिकतम 5 साल की सजा है। संशोधन के बाद सजा कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल हो सकती है। इसके अलावा अधिकतम जुर्माने को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है।

परीक्षा में गड़बड़ी में शामिल पाए जाने वाले सर्विस प्रोवाइडर्स पर भी सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। ऐसे मामलों में अधिकतम जुर्माना 5 करोड़ रुपये तक किया जा सकता है। साथ ही उन्हें सार्वजनिक परीक्षा आयोजित करने से प्रतिबंधित करने की अवधि 4 साल से बढ़ाकर 8 साल करने का प्रस्ताव है।संगठित तरीके से परीक्षा में अपराध करने के मामलों में न्यूनतम सजा 5 साल से बढ़ाकर 7 साल करने का प्रस्ताव है। यह सजा अधिकतम 10 साल तक हो सकती है। वहीं, अधिकतम जुर्माना 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है।

बिल में पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े अपराधों की जांच के लिए केंद्र सरकार को स्पेशल टास्क फोर्स बनाने का अधिकार देने का प्रस्ताव है। इसके अलावा जांच को दो महीने के अंदर पूरा करने की समय सीमा तय करने की बात कही गई है। ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए सेशन कोर्ट को स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के रूप में नामित किया जा सकता है। चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के अंदर ट्रायल पूरा करने और हर स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के लिए स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करने का भी प्रस्ताव है।

जितेंद्र सिंह ने कहा कि पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों से जुड़े मामलों की जांच दो महीने के अंदर पूरी करनी होगी, चाहे जांच केंद्रीय एजेंसी करे या स्पेशल टास्क फोर्स। जितेंद्र सिंह ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकारों के समय हुए पेपर लीक के मामलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग वर्षों में रेलवे भर्ती बोर्ड, इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा, AIIMS और अन्य परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले सामने आए थे।

उन्होंने NTA को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना साधा। जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश में एक राष्ट्रीय स्तर की टेस्टिंग एजेंसी बनाने की जरूरत पहले भी महसूस की गई थी और NTA का गठन 2017 में मौजूदा सरकार के दौरान हुआ। उन्होंने कहा कि इस कानून की जरूरत लंबे समय से थी और मौजूदा सरकार ने इस अधूरे काम को पूरा किया है। वहीं, लोकसभा में इस बिल पर चर्चा दोपहर 2 बजे शुरू हुई। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, DMK और NCP समेत विभिन्न दलों के नेताओं ने चर्चा का समय 6 घंटे से बढ़ाकर 8 घंटे करने पर सहमति जताई है।