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लोकसभा में बांसुरी स्वराज का बड़ा बयान, 'एंटी-पेपर लीक बिल मोदी सरकार की संवेदनशीलता का प्रमाण

लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर मंगलवार को हुई चर्चा के दौरान बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कांग्रेस और विपक्ष पर पेपर लीक के मुद्दे पर 'चुनिंदा विरोध' करने का आरोप लगाया। बांसुरी स्वराज ने कहा कि पेपर लीक कोई नई समस्या नहीं है और यह किसी एक सरकार तक सीमित नहीं रही है। उन्होंने विपक्ष से सवाल करते हुए कहा कि अगर यह लड़ाई सिद्धांत की है, तो सरकार बदलने के साथ सिद्धांत क्यों बदल जाता है।

उन्होंने इस संशोधन को समय की जरूरत बताते हुए कहा कि पेपर लीक के कारण देश के मेहनती छात्रों के साथ अन्याय होता है। उन्होंने कहा कि परीक्षा में गड़बड़ी होने से छात्रों की मेहनत और योग्यता पर असर पड़ता है। बीजेपी सांसद ने कहा कि देश में एक संगठित 'एजुकेशन माफिया' काम कर रहा है, जो अलग-अलग राज्यों में सक्रिय है। उन्होंने कहा कि यह बिल जांच के अधिकार को लेकर होने वाली परेशानियों को दूर करेगा। इसके तहत केंद्र सरकार पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े मामलों की जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स बना सकती है।

उन्होंने बताया कि हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का भी प्रावधान है। जांच एजेंसियों को दो महीने में जांच पूरी करनी होगी और फास्ट ट्रैक कोर्ट को तीन महीने में फैसला सुनाना होगा। उन्होंने कहा कि अपील की स्थिति में मामला सीधे हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच में जाएगा।

बांसुरी स्वराज ने 2014 के बाद शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियां भी गिनाईं। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में मेडिकल कॉलेज और मेडिकल सीटों की संख्या दोगुनी हुई है। IIT की संख्या 16 से बढ़कर 23 और IIM की संख्या 13 से बढ़कर 21 हो गई है। वहीं, देश में काम कर रहे AIIMS की संख्या 7 से बढ़कर 20 हो गई है और विश्वविद्यालयों की संख्या में भी 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

इससे पहले केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि जरूरत पड़ने पर पेपर लीक बिल पर चर्चा का समय बढ़ाकर 10 घंटे तक किया जा सकता है। इस बिल में पेपर लीक और परीक्षा में संगठित गड़बड़ियों को रोकने के लिए कानून को और सख्त बनाने का प्रस्ताव है। इसमें तेज जांच, स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट, स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की नियुक्ति और अपील के जल्द निपटारे का प्रावधान है।

बिल में अनुचित तरीकों का इस्तेमाल करने वालों के लिए सजा बढ़ाने का भी प्रस्ताव है। मौजूदा कानून में कम से कम 3 साल और अधिकतम 5 साल की जेल की सजा है, जिसे बढ़ाकर कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल करने का प्रस्ताव है। वहीं, अधिकतम जुर्माने को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये करने की बात कही गई है।