Madhya Pradesh: हाथियों की आवाजाही पर नजर रखने और इंसान और जानवर के बीच टकराव को ज्यादा बेहतर तरीके से रोकने के लिए मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व ने खास पहल की है। यहां जंगली हाथियों को यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर यानी विशिष्ट पहचान संख्या दी जा रही है ताकि उनकी पहचान करने में आसानी हो।
नेशनल पार्क में अब तक जंगली हाथियों को ट्रैक करने के लिए ये देखा जाता था कि वे किस रास्ते से आ रहे हैं और कहां-कहां से गुजर रहे हैं। हालांकि अब यूनिक आईडी नंबर देने से अधिकारियों के लिए हाथियों पर नजर रखना आसान हो जाएगा। यहां बाघों के लिए भी ऐसी ही व्यवस्था पहले से ही लागू है।
वीओ: वाइल्डलाइफ रिसर्च एंड कंजर्वेशन सोसायटी की मदद से लागू की जा रही इस पहल में हर हाथी की सभी संभावित एंगल से साफ तस्वीरें खींचना शामिल है। इन तस्वीरों से उनके कान, दांत, पूंछ और सिर के आकार जैसी खास विशेषताओं की पहचान करने में मदद मिलती है। कैमरा ट्रैप के जरिए भी तस्वीरें इकट्ठा की जा रही हैं। हालांकि बेहतर क्वालिटी की तस्वीरों के लिए फील्ड टीमों को भी तैनात किया जाता है।
अधिकारियों के मुताबिक जंगली हाथियों ने इस इलाके की समृद्ध जैव विविधता और बड़ी मात्रा में मौजूद चारे से आकर्षित होकर लगभग सात साल पहले झारखंड और छत्तीसगढ़ से बांधवगढ़ में रहने के लिए रुख किया था। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व को अपना घर बना चुके इन जंगली हाथियों के लिए एक वैज्ञानिक निगरानी प्रणाली बनाने के लिए ये पहल शुरू की गई है।