ओवरथिंकिंग यानी किसी बात को बार-बार, बिना रुके, मन में दोहराते रहना, ये तनाव और एंग्जायटी का एक ऐसा लक्षण है, जिसके बारे में अक्सर लोग खुलकर बात नहीं करते। यह सिर्फ सोचने की आदत नहीं, बल्कि खुद को मानसिक रूप से थकाने वाली प्रक्रिया है, जिसमें इंसान लगातार खुद की कमियों पर फोकस करता है, हर स्थिति का नेगेटिव पहलू सोचता है और आखिर में खुद को ही गलत ठहराने लगता है।
इस मानसिक उलझन से निकल पाना आसान नहीं होता, लेकिन असंभव भी नहीं। इमोशनल सपोर्ट ओवरथिंकिंग से लड़ने में बहुत मददगार हो सकता है। कभी-कभी सिर्फ किसी अपने से बात कर लेना, मन की बात खुलकर कह देना भी बहुत बड़ा हल्का एहसास देता है।
इसके अलावा, डायरी लिखना, या जिसे ब्रेन डंपिंग भी कहा जाता है, एक बेहतरीन तरीका है। इसमें आप अपने विचार, भावनाएं और चिंता के कारणों को बिना सेंसर किए कागज पर उतार सकते हैं, ये न केवल मन को हल्का करता है, बल्कि चीजों को साफ रूप से देखने में भी मदद करता है।
अपने विचारों को लिखना न सिर्फ आपके दिमाग की उथल-पुथल को समझने का एक बेहतरीन तरीका है, बल्कि यह आपकी मेंटल प्रोग्रेस को ट्रैक करने में भी मदद करता है। जब आप अपने मन में चल रही सारी बातें कागज पर उतारते हैं, तो आपको लगता है कि आपकी चिंताएं कुछ ज्यादा ही बढ़ी-चढ़ी हो सकती हैं, और इस प्रोसेस से मानसिक शांति मिलती है।
ओवरथिंकिंग को जड़ से खत्म करने के लिए सबसे जरूरी चीज है, एक पॉजिटिव अप्रोच। जीवन में आने वाली कठिनाइयों से लड़ने के लिए हमें अपनी सोच को सकारात्मक दिशा में मोड़ने की जरूरत है। जब हम चीजों को एक सकारात्मक नजरिए से देखने लगते हैं, तो समस्याएं छोटी और सॉल्व करने लायक लगने लगती हैं।
ओवरथिंकिंग को ऐसे करें हैंडल-
- जो भी काम कर रहे हैं, उससे ब्रेक लें और लंबी गहरी सांस खींचें।
- जो भी स्थिति सामने आते जाती है, उसे स्वीकार कर के उसके अनुसार अगले दिन की टू डू लिस्ट बनाएं और खुद को हर स्थिति में बिजी रखें।
- जब ऐसा महसूस हो कि दिमाग अब ओवरथिंकिंग शुरू करने वाला है, तभी उठें और एक छोटा सा वॉक लें, गाना सुनें या फिर अपना फेवरेट खाने को खाएं। इससे दिमाग डिस्ट्रेक्ट होता है।
- ओवरथिंकिंग करने की जगह दिमाग में आ रही भावनाओं को डायरी में लिखें। भले ही ग्रामर न ठीक हो, या फिर आपके द्वारा लिखी गई बातें फिजूल और बेसिर पैर की हो, तब भी लिखें और फिर मन कुछ हल्का महसूस होने लगे तो इस पेपर को डायरी से हटा भी सकते हैं।
- पैसे आज हैं तो कल नहीं हैं, पैसों के बारे में ओवरथिंकिंग करने से समय और स्वास्थ्य भी खराब होता है।
- ज्यादा बोलने की बजाए ज्यादा सुनें। बोलने में कुछ ज्यादा मुंह से निकल जाने पर ओवरथिंकिंग की बाढ़ सी आ जाती है। इससे बेहतर है कि जमीन से जुड़े रहे, लोगों की बातें सुनें और अपनी बात किसी के ऊपर न थोपें।
- समस्याओं की जानकारी होने पर भी उसे हैंडल न कर पाने के कारण ये जेनरेशन मेंटल हेल्थ के सेक्टर की जनसंख्या और भी बढ़ाती है। अनुभवी लोगों के जीवन को समझने की जगह उनसे सीखें और ओवरथिंकिंग कर के अपनी समस्याओं को और बढ़ावा न दें।
ओवरथिंकिंग से बचने के लिए योगासन-
ओवरथिंकिंग से बचने के लिए आप इन 3 योगासन को रोजाना सुबह करें। ऐसा करने से आप अपने काम में फोकस कर पाएंगे और आपका दिमाग ओवरथिंकिंग करने से बचेगा।
बद्ध कोणासन
रोजाना बद्ध कोणासन करने से तनाव कम होता है। यह आसन लोअर बैक मसल्स को आराम देने और रिलैक्स करने में मदद करता है, जिससे शरीर और मन दोनों को शांति मिलती है। इस आसन को करने से नींद की समस्या और थकान भी दूर होता है। जब शरीर में तनाव कम होता है, तो दिमाग को शांति प्राप्त होती है, जिससे दिनभर की थकावट भी धीरे-धीरे खत्म हो जाती है। इसलिए, अगर आप मानसिक और शारीरिक तनाव से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो बद्ध कोणासन को अपनी लाइफस्टाइल में शामिल करें।
बालासन
बालासन दिमाग में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाने में बहुत प्रभावी है। इस आसन के अभ्यास से न केवल शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य को भी मजबूत बनाता है। बालासन ओवरथिंकिंग की समस्या को कम करने में भी मदद करता है, क्योंकि यह मानसिक तनाव को कम करता है और शांति प्रदान करता है। साथ ही, इस आसन में मसल्स अच्छे से स्ट्रेच होते हैं, जिससे शरीर में ऑक्सीजन का लेवल अच्छा बना रहता है और एनर्जी भी रहती है।
सुप्त मत्स्येन्द्रासन
रोजाना सुप्त मत्स्येन्द्रासन करने से इमोशनल मजबूती प्राप्त होती है। यह आसन पेट की मांसपेशियों में खिंचाव लाकर शरीर को लचीला बनाता है और साथ ही दिमाग में ब्लड सर्कुलेशन को भी बढ़ाता है। इससे शरीर में एनर्जी का फ्लो बेहतर होता है और शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद मिलती है। रोजाना इस आसन को करने से मानसिक शांति और आत्मविश्वास में बढ़ावा होता है।