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कब बढ़ जाता है काला मोतिया का खतरा, जानें इसके लक्षण और बचाव

काला मोतिया, जिसे मेडिकल भाषा में ग्लूकोमा कहा जाता है, एक आंखों की गंभीर बीमारी है जो धीरे-धीरे आंखों की रोशनी को नुकसान पहुंचाती है। इस बीमारी में आंखों के अंदर दबाव (आईएनटी) बढ़ जाता है, जिससे आंखों के ऑप्टिक तंत्रिका (optic nerve) पर असर पड़ता है और परिणामस्वरूप दृष्टि की क्षति होती है। अगर इसका समय रहते इलाज न किया जाए, तो यह अंधेपन का कारण बन सकता है।

यह बीमारी अक्सर धीरे-धीरे विकसित होती है, जिससे शुरुआत में लक्षण नज़र नहीं आते। आइए जानते हैं, कब काला मोतिया का खतरा बढ़ता है, इसके लक्षण क्या हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है।

काला मोतिया का खतरा कब बढ़ता है?
काले मोतिया का खतरा कुछ खास परिस्थितियों में अधिक बढ़ जाता है, जैसे:

उम्र बढ़ने के साथ: यह बीमारी आमतौर पर 40 साल और उससे अधिक उम्र के व्यक्तियों में देखी जाती है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, आंखों की रक्षा प्रणाली कमजोर हो सकती है।

परिवारिक इतिहास: अगर किसी के परिवार में काला मोतिया या ग्लूकोमा की बीमारी रही हो, तो उसे इसका खतरा ज्यादा हो सकता है।

हाई ब्लड प्रेशर: जो लोग उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) से पीड़ित होते हैं, उन्हें भी काला मोतिया होने का खतरा बढ़ जाता है।

मधुमेह (Diabetes): डायबिटीज से पीड़ित व्यक्तियों में भी ग्लूकोमा का खतरा अधिक होता है क्योंकि यह आंखों के रक्तवाहिकाओं को प्रभावित कर सकता है।

आंखों की चोट: आंखों में चोट लगने से भी काला मोतिया विकसित हो सकता है।

किसी अन्य आंखों की बीमारी का होना: कुछ अन्य आंखों की बीमारियाँ, जैसे आंखों का संक्रमण या हाई रेटिना समस्या, काला मोतिया होने का कारण बन सकती हैं।

काले मोतिया के लक्षण
काला मोतिया शुरुआत में बहुत धीरे-धीरे बढ़ता है और इसमें स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। लेकिन जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, कुछ लक्षण दिख सकते हैं:

धीरे-धीरे दृष्टि का नुकसान: इस बीमारी का प्रमुख लक्षण धीरे-धीरे दृष्टि का धुंधला होना या आँखों की रोशनी का कम होना है, खासकर किनारे की दृष्टि में (peripheral vision)।

आंखों में दर्द या दबाव: आंखों में दर्द, जलन या भारीपन महसूस हो सकता है।

चमकदार रोशनी के आसपास हल्के घेरा का दिखना: काले मोतिया में रोगी को कभी-कभी रोशनी के चारों ओर घेरा दिख सकता है, जो आँखों के अंदर दबाव बढ़ने का संकेत हो सकता है।

नौसेया और सिरदर्द: अत्यधिक आईएनटी के कारण सिरदर्द और उल्टी भी हो सकती है।

रात के समय दृष्टि में समस्या: अंधेरे में देखने में परेशानी होना, जिससे रात को सड़क पर चलना कठिन हो सकता है।

काले मोतिया से बचाव
काला मोतिया एक गंभीर बीमारी है, लेकिन समय पर पहचान और इलाज से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं:

नियमित आंखों की जांच: नियमित रूप से आंखों की जांच करवाएं, खासकर अगर आप 40 वर्ष से ऊपर हैं या परिवार में किसी को ग्लूकोमा है। समय रहते बीमारी का पता चलने से इलाज आसान हो सकता है।

आंखों का दबाव कम करने के उपाय: डॉक्टर के द्वारा सुझाए गए दवाइयों और इलाज से आंखों का दबाव कम किया जा सकता है।

स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं: संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और वजन नियंत्रण से आप काले मोतिया के खतरे को कम कर सकते हैं।

मधुमेह और उच्च रक्तचाप का नियंत्रण: यदि आप डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं, तो इन्हें सही से नियंत्रित करें क्योंकि ये दोनों काला मोतिया के जोखिम को बढ़ाते हैं।

धूम्रपान और शराब से बचें: धूम्रपान और शराब का सेवन काले मोतिया के खतरे को बढ़ा सकते हैं। इसलिए इन्हें सीमित करने का प्रयास करें।

आंखों की सुरक्षा करें: तेज़ धूप, धूल और अन्य हानिकारक तत्वों से अपनी आंखों को सुरक्षित रखें। धूप में बाहर जाते समय UV प्रोटेक्शन वाले चश्मे का उपयोग करें।

काला मोतिया एक खतरनाक आंखों की बीमारी है, जो समय रहते पहचानने और इलाज करने से पूरी तरह से नियंत्रित की जा सकती है। इसके लक्षण शुरुआत में हल्के होते हैं, लेकिन अगर इसे नजरअंदाज किया जाए तो यह अंधेपन का कारण बन सकता है। इसलिए, अपनी आंखों की देखभाल और नियमित जांच बेहद महत्वपूर्ण है, ताकि इस बीमारी से बचा जा सके और अपनी आंखों की रोशनी को बनाए रखा जा सके।