Breaking News

टीम इंडिया के हेड कोच गंभीर मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर पहुंचे, बप्पा के दर्शन किए     |   खड़गे को नरवणे की बुक से कोट की इजाजत नहीं मिलने पर विपक्ष का राज्यसभा से वॉकआउट     |   गुजरात HC ने 45000 वर्ग मीटर जमीन आसाराम से वापस लेने की राज्य सरकार को मंजूरी दी     |   लोकसभा की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित     |   कांग्रेस सांसद इमरान मसूद बोले- पहले राहुल जी को सुनें, उसके बाद ही प्रधानमंत्री को बोलने देंगे     |  

क्या Anxiety से स्किन पर पड़ता है असर? जानें क्या कहते है एक्सपर्ट

एंग्जाइटी (Anxiety) केवल मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर प्रभाव नहीं डालती, बल्कि यह शारीरिक स्वास्थ्य, विशेषकर त्वचा पर भी असर डाल सकती है। जब हम तनाव या चिंता महसूस करते हैं, तो हमारे शरीर में कुछ शारीरिक प्रतिक्रियाएं होती हैं, जो हमारी त्वचा पर दिखाई देती हैं। आइए जानते हैं कि एंग्जाइटी का हमारी त्वचा पर किस प्रकार प्रभाव पड़ सकता है।

1. पिम्पल्स और एक्ने (Pimples and Acne)
जब शरीर में चिंता या तनाव होता है, तो शरीर के एड्रेनल ग्लैंड्स (Adrenal glands) से कॉर्टिसोल (Cortisol) नामक हार्मोन रिलीज होता है। इस हार्मोन का स्तर बढ़ने से तेल ग्रंथियाँ (Sebaceous glands) अधिक सक्रिय हो जाती हैं, जो ज्यादा तेल (sebum) का उत्पादन करती हैं। यह अतिरिक्त तेल त्वचा के रोमछिद्रों को बंद कर सकता है, जिससे पिम्पल्स और एक्ने की समस्या बढ़ सकती है।

2. त्वचा की जलन और लालिमा (Skin Redness and Irritation)
चिंता और तनाव से शरीर में सूजन (Inflammation) हो सकती है, जिससे त्वचा में जलन और लालिमा महसूस हो सकती है। इससे त्वचा अधिक संवेदनशील हो जाती है, और यह एलर्जी या अन्य त्वचा समस्याओं को बढ़ा सकता है।

3. त्वचा में खिंचाव (Skin Tightness)
जब किसी को चिंता होती है, तो शरीर में मांसपेशियों का तनाव (Muscle tension) भी बढ़ जाता है। इस तनाव के कारण चेहरे की मांसपेशियाँ भी तंग हो सकती हैं, जिससे त्वचा में खिंचाव और आराम की कमी हो सकती है। यह आमतौर पर माथे, आंखों के आसपास और जबड़े के क्षेत्र में महसूस होता है।

4. झुर्रियाँ और उम्र बढ़ने के संकेत (Wrinkles and Premature Aging)
जब हम चिंता करते हैं, तो कॉर्टिसोल का स्तर अधिक होता है, जो कोलेजन (Collagen) के टूटने का कारण बन सकता है। कोलेजन हमारी त्वचा को टाइट और मजबूत बनाता है। कोलेजन के टूटने से त्वचा में लचीलापन कम होता है, जिससे झुर्रियाँ और समय से पहले उम्र बढ़ने के संकेत दिखाई देने लगते हैं।

5. सूखी त्वचा (Dry Skin)
एंग्जाइटी का एक और असर यह हो सकता है कि यह त्वचा की प्राकृतिक नमी को छीन सकता है। जब चिंता होती है, तो हम अक्सर अधिक पानी पीना भूल जाते हैं, और शरीर में पानी की कमी हो सकती है, जो त्वचा को सूखा और बेजान बना देती है। इसके अलावा, अधिक तनाव के कारण शरीर में रक्त प्रवाह भी प्रभावित हो सकता है, जिससे त्वचा को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता और यह अधिक सूखी हो जाती है।

6. त्वचा पर एलर्जी (Skin Allergies)
चिंता और तनाव से शरीर में हॉर्मोनल असंतुलन हो सकता है, जिससे त्वचा पर एलर्जी और खुजली जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। तनाव के समय कुछ लोग त्वचा को रगड़ने या खरोंचने की आदत डाल सकते हैं, जिससे त्वचा पर घाव और खुजली हो सकती है।

7. हाइपरहाइड्रोसिस (Excessive Sweating)
कुछ लोगों में चिंता और तनाव के दौरान अधिक पसीना आ सकता है, जिसे हाइपरहाइड्रोसिस कहा जाता है। अत्यधिक पसीना त्वचा पर जलन, बिन बुलाए पिम्पल्स और खराब त्वचा की स्थिति का कारण बन सकता है।

8. डार्क सर्कल्स और बैग्स (Dark Circles and Bags under Eyes)
चिंता के कारण नींद में कमी हो सकती है, और नींद की कमी सीधे तौर पर हमारी त्वचा पर असर डालती है। खासकर आंखों के नीचे डार्क सर्कल्स और बैग्स दिखाई देने लगते हैं। निरंतर तनाव और चिंता से आपकी त्वचा की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है।

9. त्वचा की रंगत में बदलाव (Changes in Skin Tone)
चिंता के दौरान शरीर में रक्त संचार की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिससे त्वचा की रंगत फीकी और असमान हो सकती है। तनाव और चिंता के कारण ब्लड सर्कुलेशन में कमी आ सकती है, जो त्वचा की चमक को प्रभावित करता है।

यह स्पष्ट है कि एंग्जाइटी का हमारी त्वचा पर गहरा असर पड़ सकता है। जब हम चिंतित होते हैं, तो यह न केवल हमारे मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि त्वचा की सेहत पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है। इसलिए, अपनी चिंता को कम करने के लिए योग, मेडिटेशन, सकारात्मक सोच, और समय पर नींद जैसी आदतें विकसित करना महत्वपूर्ण है। यदि आपकी त्वचा में चिंता के कारण कोई समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं, तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना भी फायदेमंद हो सकता है।