West Asia Crisis: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी यानी आईईए के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने चेतावनी दी है कि ईरान-इजराइल युद्ध के कारण दुनिया में ऊर्जा का ऐसा संकट पैदा होगा जिससे कोई भी देश नहीं बचेगा।
1973 के तेल संकट और अरब देशों की ओर से पश्चिमी देशों पर लगाए गए तेल प्रतिबंध के बाद 1974 में अंतररष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की स्थापना की गई थी। ये सदस्य देशों को ऊर्जा आपूर्ति में अचानक आने वाली रुकावटों से निपटने में मदद करता है।
फातिह बिरोल का कहना है कि ईरान-इजराइली युद्ध का प्रभाव 1973 के तेल संकट और यहां तक कि रूस-यूक्रेन युद्ध से भी कहीं ज्यादा व्यापक हो सकता है, क्योंकि इस इलाके में दर्जनों ऊर्जा भंडार पहले ही क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।
आईईए, ऊर्जा संकट के समय सक्रिय रूप से काम करता है। इसके सदस्य देशों के पास करीब 90 दिन का तेल भंडार होता है, जिसे आपूर्ति में व्यवधान बढ़ने पर बाजारों को स्थिर करने के लिए जारी किया जा सकता है। भारत, वर्तमान में इसका सदस्य देश है और पूर्ण सदस्यता के लिए बातचीत चल रही है।