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जम्मू-कश्मीर में आरक्षित सीटें किसकी करेंगी सत्ता सुरक्षित

जम्मू-कश्मीर में दस साल बाद हो रहे विधानसभा चुनाव 2014 के मुकाबले काफी अलग है. अनुच्छेद 370 को हटाए जाने से जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म हो गया और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया है. इसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया में जम्मू और कश्मीर की विधानसभा सीटों में बहुत ज्यादा फर्क नहीं रह गया है. इतना ही नहीं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए विधानसभा सीटें रिजर्व हो गई हैं. यह आरक्षित सीटें सत्ता को सुरक्षित करने में अहम रोल अदा करेंगी, जिन्हें किंगमेकर माना जा रहा है.

जम्मू-कश्मीर में अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए 16 विधानसभा सीटें आरक्षित की गई हैं. इसमें अनुसूचित जाति की सात और अनुसूचित जनजाति के लिए नौ विधानसभा सीटें आरक्षित की गई हैं. पहली बार एससी और एसटी आरक्षण से इस वर्ग से जुड़े मतदाताओं में खासा उत्साह है. इन 16 सुरक्षित विधानसभा सीटों पर जो पार्टी अपना कब्जा जमाने में कामयाब रहती हैं, वो निर्णायक भूमिका में होंगी.