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योगी सरकार को बड़ी राहत: कनिष्ठ विश्लेषक के 417 पदों पर भर्ती का रास्ता साफ, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग (यूपीएफएसडीए) में कनिष्ठ विश्लेषक (खाद्य) के 417 पदों पर भर्ती को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत की दो सदस्यीय खंडपीठ ने भर्ती के लिए निर्धारित शैक्षिक योग्यता को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। इस फैसले से भर्ती नियमों की वैधानिकता पर उठाए गए सवालों का निस्तारण हो गया है और चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है।

न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय और न्यायमूर्ति आलोक माथुर की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि कनिष्ठ विश्लेषक (खाद्य) पद के लिए राज्य सरकार की ओर से निर्धारित शैक्षिक योग्यता वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप है। अदालत ने संबंधित भर्ती नियमों को वैध ठहराया।

शैक्षिक योग्यता को लेकर दाखिल हुई थी याचिका

यह मामला विज्ञापन संख्या 04/2024 के तहत कनिष्ठ विश्लेषक (खाद्य) के 417 पदों पर सीधी भर्ती से जुड़ा है। पंकज कुमार समेत 10 याचिकाकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग विश्लेषक (खाद्य एवं औषधि प्रयोगशाला) सेवा नियमावली, 2017 के नियम 8(2) में वर्ष 2020 में किए गए संशोधन और भर्ती विज्ञापन में निर्धारित शैक्षिक योग्यता को चुनौती दी थी।

याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि खाद्य प्रौद्योगिकी, डेयरी प्रौद्योगिकी, ऑयल टेक्नोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी जैसी विषयगत डिग्रियों को भी भर्ती के लिए पात्रता में शामिल किया जाना चाहिए। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस चुनौती को स्वीकार नहीं किया।

कनिष्ठ विश्लेषक और खाद्य विश्लेषक के पद अलग

खंडपीठ ने अपने फैसले में कनिष्ठ विश्लेषक (खाद्य) और खाद्य विश्लेषक के पदों के बीच अंतर को महत्वपूर्ण माना। अदालत के अनुसार, दोनों पदों की प्रकृति और उन पर लागू सेवा नियम अलग-अलग हैं। ऐसे में दोनों पदों की शैक्षिक योग्यता को एक समान मानना जरूरी नहीं है।

अदालत ने कहा कि राज्य सरकार ने कनिष्ठ विश्लेषक (खाद्य) के पद के लिए योग्यता निर्धारित करते समय संबंधित केंद्रीय नियमों में खाद्य विश्लेषक के लिए उपलब्ध वैकल्पिक न्यूनतम योग्यताओं में से एक को शामिल किया है। इसलिए भर्ती नियमों में कोई कानूनी विरोधाभास नहीं है।

भर्ती नियमों में बदलाव करना सरकार का अधिकार

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भर्ती में अतिरिक्त शैक्षिक योग्यताएं शामिल करना या किसी डिग्री को समकक्ष घोषित करना राज्य सरकार और संबंधित भर्ती प्राधिकारी के नीतिगत अधिकार क्षेत्र में आता है। न्यायालय स्वयं भर्ती नियमों में नई योग्यताएं जोड़कर उन्हें दोबारा नहीं लिख सकता।

इसी आधार पर अदालत ने नियम 8(2) को वैध ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी। फैसले से भर्ती की निर्धारित शैक्षिक योग्यता को लेकर चल रही कानूनी चुनौती समाप्त हो गई है।

417 पदों पर चयन प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद

कनिष्ठ विश्लेषक (खाद्य) के 417 पदों पर भर्ती के लिए लिखित परीक्षा और दस्तावेज सत्यापन पहले ही हो चुके हैं। हाईकोर्ट के फैसले के बाद चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता खुला है। हालांकि, आगे की प्रक्रिया और चयन से संबंधित समयसीमा विभाग के अगले निर्णयों पर निर्भर करेगी।

इन पदों पर नियुक्तियों से खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग को तकनीकी मानव संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। इससे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच, प्रयोगशाला संबंधी कार्यों और उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा से जुड़े कामों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

योगी सरकार के मिशन रोजगार के लिए अहम फैसला

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार सरकारी भर्तियों और युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है। कनिष्ठ विश्लेषक (खाद्य) के 417 पदों से जुड़े मामले में कानूनी चुनौती खारिज होना इसी दिशा में महत्वपूर्ण है। अब विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई के बाद भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकेगा।