दरअसल हाल ही में एक लेख (एक आर्थिक सलाहकार) जजों की छुट्टियों पर छपा था, जिसको लेकर सर्वोच्च अदालत ने यह टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि शायद ही ऐसा कोई मामला हो, जो सरकार द्वारा समय पर दाखिल किया जाता हो.हेमंत सोरेन की याचिका पर सुनवाई के दौरान बेंच की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है मिस्टर कपिल सिब्बल कि इतने घंटे लगाने के बावजूद, हमें यह सुनना पड़ता है कि जज बहुत कम घंटे काम करते हैं. सिब्बल हेमंत सोरेन के लिए बेंच के समक्ष पेश हुए थे.