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उत्तराखंड: कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर भूस्खलन के बाद BRO ने बहाल की सड़क, फिर शुरू हुई आवाजाही

उत्तराखंड में कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर 10 जुलाई को हुए भूस्खलन के बाद सीमा सड़क संगठन (BRO) ने रविवार को सड़क संपर्क पूरी तरह बहाल कर दिया। इसके साथ ही तीर्थयात्रियों और आवश्यक वाहनों की आवाजाही दोबारा सुचारु रूप से शुरू हो गई। BRO के 'प्रोजेक्ट हिरक' की टीमों ने लगातार मेहनत करते हुए मलबा हटाया और कम समय में सड़क को फिर से चालू कर दिया। संगठन ने बताया कि उनकी त्वरित कार्रवाई से यात्रियों को अधिक समय तक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।

BRO ने कहा, "10 जुलाई को कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर हुए भूस्खलन के बाद प्रोजेक्ट हिरक की टीमों ने तेजी से मलबा हटाकर सड़क संपर्क बहाल किया, जिससे तीर्थयात्रियों और आवश्यक यातायात की सुरक्षित एवं निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित हो सकी।" BRO ने दोहराया कि वह सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत रखने के लिए प्रतिबद्ध है। संगठन ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी वह "सीमाओं को जोड़ने, समुदायों की सेवा करने और आस्था की यात्राओं को सुगम बनाने" के अपने संकल्प पर कायम है।

कैलाश मानसरोवर यात्रा हिंदू धर्म में भगवान शिव के निवास स्थान के रूप में अत्यंत पवित्र मानी जाती है। इसके अलावा जैन और बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए भी इस यात्रा का विशेष धार्मिक महत्व है। हर वर्ष बड़ी संख्या में भारतीय श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होते हैं। यह यात्रा केवल वैध भारतीय पासपोर्ट रखने वाले पात्र भारतीय नागरिकों के लिए धार्मिक उद्देश्य से आयोजित की जाती है।

5 जुलाई को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चंपावत जिले के टनकपुर पर्यटन विश्राम गृह से कैलाश मानसरोवर यात्रा-2026 के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। मुख्यमंत्री ने बताया था कि पहले जत्थे में 49 शिव भक्त शामिल थे और राज्य सरकार ने उनकी सुरक्षित एवं सुविधाजनक यात्रा के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए हैं। उन्होंने कहा कि कुमाऊं मंडल विकास निगम, जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस यात्रा की लगातार निगरानी कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने यह भी कहा था कि सीमावर्ती क्षेत्रों से होकर गुजरने वाली यह यात्रा आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगी। साथ ही तीर्थयात्रियों को स्थानीय संस्कृति और उत्पादों से परिचित होने का अवसर मिलेगा तथा यात्रा पूरी करने के बाद वे उत्तराखंड की संस्कृति और विरासत के ब्रांड एंबेसडर के रूप में भी कार्य करेंगे।