उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ की आशा कार्यकर्ता राजबाला देवी ने अपने काम और मेहनत से अलग पहचान बनाई है। कभी घर-घर जाकर महिलाओं को स्वास्थ्य योजनाओं के प्रति जागरूक करने पर उन्हें ताने सुनने पड़ते थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आज वह 3,000 से अधिक महिलाओं को स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं का लाभ दिला चुकी हैं। उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए 26 जनवरी 2025 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित भी किया गया।
राजबाला देवी ने वर्ष 2006 में आशा कार्यकर्ता के रूप में काम शुरू किया था। उस समय ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य योजनाओं को लेकर जागरूकता कम थी। महिलाओं को अस्पताल में प्रसव कराने, बच्चों का टीकाकरण कराने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए समझाना आसान नहीं था। इस दौरान उन्हें कई बार लोगों के ताने भी सुनने पड़े। परिवार का सहयोग कम होने के बावजूद उन्होंने अपना काम जारी रखा और धीरे-धीरे लोगों का भरोसा जीता।
3,000 से अधिक महिलाओं तक पहुंचाईं स्वास्थ्य योजनाएं
राजबाला देवी ने अब तक 3,000 से अधिक महिलाओं को स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाने में मदद की है। वह गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में प्रसव कराने के फायदे समझाती हैं, ताकि मां और बच्चे दोनों की सेहत सुरक्षित रहे। उनका प्रयास रहता है कि गर्भवती महिलाओं को समय पर जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं मिलें।
टीकाकरण से आयुष्मान कार्ड तक में निभाई अहम भूमिका
राजबाला देवी ने बच्चों के टीकाकरण, परिवार नियोजन और परिवार कल्याण से जुड़ी योजनाओं के प्रति भी लोगों को जागरूक किया। उन्होंने जरूरतमंद परिवारों के आयुष्मान कार्ड बनवाने में मदद की, जिससे पात्र लोगों को योजना के तहत पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिल सके। इसके अलावा, उन्होंने आधार कार्ड और अन्य सरकारी योजनाओं से जुड़ी गतिविधियों में भी सहयोग किया।
राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान
राजबाला देवी के काम को जिले, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। उन्हें जिले में 'अलीगढ़ रत्न' सम्मान से नवाजा गया। इसके अलावा, स्वास्थ्य कार्यक्रमों को लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रदेश स्तर पर भी सम्मान मिला। 26 जनवरी 2025 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से उन्हें उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया।
मानदेय और प्रोत्साहन राशि से मिली आर्थिक मजबूती
राजबाला देवी के मुताबिक, शुरुआती दौर में आशा कार्यकर्ताओं को मिलने वाला मानदेय काफी कम था। योगी सरकार की ओर से मानदेय और प्रोत्साहन राशि में बढ़ोतरी से उन्हें आर्थिक मदद मिली है। इससे परिवार का खर्च चलाने में पहले के मुकाबले सहूलियत हुई है।
आशा कार्यकर्ता गांव-गांव और घर-घर जाकर मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, पोषण, परिवार नियोजन और बीमारी की रोकथाम के बारे में लोगों को जागरूक करती हैं। वे स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं को पात्र लोगों तक पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभाती हैं। राजबाला देवी की कहानी बताती है कि लगातार मेहनत और लोगों की सेवा से मुश्किल परिस्थितियों में भी अपनी पहचान बनाई जा सकती है।